मनुष्य का वास्तविक उत्थान बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि उसे निरंतर साधना में निहित है: लब्धिवल्लभसूरी
आचार्यश्री लब्धिवल्लभसूरीजी के संयम जीवन की 30वीं वर्षगांठ पर हुआ आध्यात्मिक प्रवचन
सिरोही (राजस्थान) पूज्य आचार्यश्री लब्धिवल्लभसूरीजी महाराज के दीक्षा एवं संयम जीवन की 30वीं वर्षगांठ के पावन अवसर पर उज्जवला फार्म हाउस कालन्द्री में बने मंदिर परिसर में एक अत्यंत दिव्य, शांत और आध्यात्मिक वातावरण में मार्मिक प्रवचन का आयोजन हुआ।
मंदिर की पवित्र छाया, वातावरण में गूंजती विभिन्न पक्षियों की मधुर ध्वनियां, हल्की-हल्की जल की बूंदों का स्पर्श और उनके बीच गुरुदेव के ओजस्वी, करुणामय एवं आत्मस्पर्शी वचन ने पूरे वातावरण को अलांैकिक बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं परमात्मा अपने वचनों के माध्यम से साधकों को संबोधित कर रहे हों और एक सौभाग्यशाली, श्रद्धामय श्रोता-समूह पूर्ण विनम्रता एवं भाव-विभोर होकर उस अमृतवाणी का श्रवण कर रहा हो।
आज आचार्यश्री का प्रवचन अत्यंत मूलभूत, गहन और आत्मजागरण से परिपूर्ण रहा। गुरुदेव ने अत्यंत सरल, सहज और प्रभावशाली भाषा में अनुभव, विचार और द्रव्य जैसे आध्यात्मिक मूल सिद्धांतों का विवेचन किया। उन्होंने समझाया कि मनुष्य का वास्तविक उत्थान बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अपने भीतर की यात्रा को पहचानने और उसे निरंतर साधने में निहित है।
गुरुदेव ने आज केवल आध्यात्मिक सिद्धांतों का ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन में उतारने की व्यावहारिक दिशा भी प्रदान की। उन्होंने साधकों को बताया कि आत्मचिंतन, सजगता, विचारों की शुद्धि और नियमित आध्यात्मिक अभ्यास के माध्यम से आंतरिक यात्रा को जीवन का सहज हिस्सा बनाया जा सकता है। उनके मार्गदर्शन में यह संदेश स्पष्ट रूप से प्रकट हुआ कि अध्यात्म कोई दूरस्थ विषय नहीं, बल्कि प्रतिदिन के जीवन में अपनाई जाने वाली सरल, सुंदर और परिवर्तनकारी साधना है।
वाचना शिविर के लाभार्थी रमेश कुमार पी शाह ने बताया कि आचार्यश्री के 30 वर्षों के संयममय जीवन की यह पुण्य वर्षगांठ सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और अविस्मरणीय रही। उनके तप, त्याग, संयम, करुणा और ज्ञानमय जीवन ने अनगिनत साधकों को धर्म, आत्मबोध और सदाचार के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। आचार्यश्री ने प्रवचन के बाद सभी भक्तों को आशीर्वाद दिया।
इस पावन अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के चरणों में कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके दीर्घ संयममय, स्वस्थ और लोककल्याणकारी जीवन की मंगलकामना की। आज का यह दिव्य आयोजन न केवल एक प्रवचन था, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाला एक आध्यात्मिक अनुभव था, जिसने प्रत्येक श्रोता के अंतर्मन में शांति, श्रद्धा और साधना का नया प्रकाश प्रज्वलित किया। कल रविवार को आचार्यश्री की वाचना के बाद सोमवार को उनका विहार होगा।
- आचार्यश्री का चातुर्मास मीरपुर तीर्थ में होगा
आचार्यश्री का इस वर्ष का चातुर्मास 7 वीं शताब्दी में निर्मित अति प्राचीन जैन तीर्थ ’’ हमीरपुरा तीर्थ ’’ मीरपुर में होगा। इस चातुर्मास का लाभ उनके परम भक्त मुंबई निवासी पंकज भाई कांतिलाल शाह परिवार को मिला हैं।


