अधिकारियों ने 2 महीने तक नहीं हटाया था अतिक्रमण, हाईकोर्ट ने तहसीलदार-पटवारी को किया सस्पेंड
राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों की पालना नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने करौली जिले की नादौती तहसील के तहसीलदार दीनदयाल शर्मा और पटवारी भरत सिंह गुर्जर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है
हाईकोर्ट ने राजस्व सचिव को निर्देश दिया है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। विभागीय जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारी निलंबित ही रहेंगे।
मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा- इन अधिकारियों के मन में कोर्ट के आदेशों के प्रति कोई सम्मान नहीं है, बल्कि इन्होंने कोर्ट का अपमान किया है। इसके साथ ही ये दोनों स्पष्ट रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करने के दोषी हैं।
- अधिकारियों ने 2 महीने तक आदेश की पालना नहीं की
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया- नादौती तहसील में अतिक्रमण को लेकर रूपराज प्रजापत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि एक निश्चित क्षेत्र में बार-बार अतिक्रमण हटाने के बाद भी अतिक्रमणकारी उस जगह पर फिर से अतिक्रमण कर लेते हैं।
इस पर हाईकोर्ट ने इन्हें आदतन अतिक्रमणकारी मानते हुए 27 अप्रैल 2026 को अतिक्रमण हटाने के लिए कहा था। 30 अप्रैल को मामला फिर से कोर्ट में आने पर हाईकोर्ट ने तहसीलदार और पटवारी से स्पष्टीकरण मांगा और मामला 20 मई को सूचीबद्ध करने के लिए कहा, लेकिन मामला उस दिन लिस्ट नहीं हो सका।
इसके बाद 2 जुलाई को मामले पर सुनवाई के दौरान दोनों अधिकारियों ने स्वीकार किया कि अतिक्रमण मौजूद है और उन्हें हटाने के लिए 7 दिन का समय और दिया जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह हमारे लिए आश्चर्य की बात है कि दोनों आराम से स्वीकार कर रहे हैं कि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ है।
- हम अवमानना की कार्रवाई जैसा कदम नहीं उठा रहे हैं
कोर्ट ने कहा- हालांकि हम दोनों अधिकारियों के खिलाफ फिलहाल अवमानना की कार्रवाई शुरू करने जैसा कदम नहीं उठा रहे हैं। लेकिन यह स्पष्ट है कि इन्होंने अतिक्रमण हटाने के अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया, जबकि इन्हें अच्छे से पता था कि यह अतिक्रमण बार-बार हो रहा है।
कोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया कि वह संबंधित SHO और राजस्व अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करें, ताकि अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए और अगली सुनवाई से पहले इसकी पालना रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। कोर्ट अब 8 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई करेगी।


