प्रशासनिक लाचारी: किशनगढ़बास में प्रमुख सरकारी विभागों के मुखियाओं के पद खाली, 'अतिरिक्त प्रभार' के भरोसे जनता
तहसीलदार, ईओ और बीडीओ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर स्थायी नियुक्ति नहीं, दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर आमजन
खैरथल (हीरालाल भूरानी) खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़बास उपखंड में सरकारी विभागों की स्थिति रामभरोसे चल रही है। यहाँ कई महत्वपूर्ण सरकारी विभाग लंबे समय से नियमित और स्थायी मुखियाओं (अधिकारियों) के बिना ही संचालित हो रहे हैं। सरकार द्वारा इन महत्वपूर्ण पदों पर स्थायी नियुक्ति करने के बजाय अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। इसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें अपने छोटे-छोटे सरकारी कार्यों के लिए भी अधिकारियों की अनुपलब्धता के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- राजस्व विभाग बेपटरी: दो तहसीलों का जिम्मा एक के पास
उपखंड में राजस्व विभाग की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। किशनगढ़बास तहसील में लंबे समय से नियमित तहसीलदार का पद रिक्त चल रहा है। वर्तमान में खैरथल तहसील के तहसीलदार अभिषेक यादव को किशनगढ़बास का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। एक ही अधिकारी के पास दो महत्वपूर्ण तहसीलों का कार्यभार होने के कारण राजस्व, भूमि और प्रमाण पत्रों से जुड़े आवश्यक कार्यों में भारी देरी हो रही है, जिससे किसान और आम लोग बेहद परेशान हैं।
- एक अधिकारी और चार नगरपालिकाओं का जिम्मा
शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं की रीढ़ मानी जाने वाली किशनगढ़बास नगरपालिका में अधिशासी अधिकारी (EO) का पद भी खाली पड़ा है। वर्तमान में ईओ राहुल अग्रवाल के पास किशनगढ़बास के साथ-साथ बर्डोद, कोटकासिम और बड़ौदा मेव सहित कुल चार नगरपालिकाओं का विशाल कार्यभार है। एक अधिकारी द्वारा चार-चार निकायों को देखना व्यावहारिक रूप से असंभव है, जिसके चलते नगर निकाय से जुड़े विकास कार्य, सफाई व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णय पूरी तरह ठप पड़े हैं।
- ग्रामीण विकास भी थमा: मुंडावर बीडीओ के भरोसे किशनगढ़बास
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का दावा करने वाले ग्रामीण विकास विभाग का हाल भी इससे अलग नहीं है। किशनगढ़बास पंचायत समिति में विकास अधिकारी (BDO) का पद खाली है। मुंडावर के बीडीओ संजय यादव को यहाँ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे दोनों पंचायत समितियों की दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जिससे ग्रामीण स्तर की जनकल्याणकारी योजनाएं गति नहीं पकड़ पा रही हैं।
- जनता की मांग: तुरंत हो स्थायी नियुक्तियां
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब भी वे अपनी समस्याओं को लेकर कार्यालयों में पहुँचते हैं, तो अधिकारी दूसरे क्षेत्र के दौरे या वहां के काम में व्यस्त मिलते हैं। अधिकारी के न मिलने से फाइलें हफ्तों लंबित रह जाती हैं और लोगों को बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं। क्षेत्रवासियों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि आमजन की सुविधा के लिए इन सभी रिक्त पदों पर तुरंत स्थायी और नियमित अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पटरी पर लौट सके।


