गुरु गोरखनाथ और उनके शिष्यों ने अपना रूप बदलकर किया उज्जैनी में प्रवेश
खैरथल (हीरालाल भूरानी)
राजर्षि अभय समाज के विशाल रंगमंच पर चल रहे नाटक महाराज भरतरी हरी को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धापूर्वक काफी संख्या में दर्शक आ रहे हैं
गुरु मछंदर नाथ की आज्ञा अनुसार गुरु गोरखनाथ और उनके चुने हुवे शिष्य अपना-अपना रूप बदलकर उज्जैनी नगरी में प्रवेश करते हैं जहां उन्हें उज्जैन के महाराजा भर्तृहरि से मुलाकात होती है यह सभी चोरों के वेष में रात्रि में भ्रमण करते हुए लोगों का माल चोरी करते हैं यहां भर्तृहरि इन्हें चोर वृत्ति से निकाल करअपने दरबार में यथा योग स्थान देकर अपने दरबार में ले आते हैं इस प्रकार चोर बने गुरु गोरखनाथ एवं उनके शिष्य चोर वृत्ति को सदा सदा के लिए छोड़ देते हैं और कहते हैं अब हम कभी चोरी नहीं करेंगे जब प्रजापति से हो गई चार आंखें तो फिर चिंता क्या रही व्यवसाय की ।
मुख्य पात्रों में भरतरी हरी का सशक्त अभिनय श्री ललित मिश्रा क्रूर सिंह एवं गोरखनाथ का अभिनय श्री अंकित शर्मा एवं अन्य चोरों में श्री मनोज कुमार गोयल एवं प्रदीप सेन तथा उनके साथी रहे।
संस्था के महामंत्री राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया के नाटक लगातार 15 दिन चलता है जिसकी की एडवांस बुकिंग दूर-दूर से लोग फोन के द्वारा भी करवाते हैं और बड़ी श्रद्धापूर्वक नाटक को देखने के लिए आते हैं ।
नाटक का निर्देशन संस्था के युवा एवं यशस्वी महानिदेशक श्री मनोज कुमार गोयल कर रहे हैं एवं नाटक का संगीत पक्ष संगीत निर्देशक श्री जितेंद्र कुमार गुप्ता के निर्देशन में अपना काफी प्रभाव दर्शकों पर छोड़ रहा है।