आधुनिक तकनीक-विकास या विनाश विषय पर सेमीनार आयोजित
भरतपुर, (कैशलेन्द्र दत्तात्रेय)। तकनीकी आधुनिक विश्व की सबसे बड़ी ताकत है और यदि किसी भी ताकत का सदुपयोग न हो तो वह विनाश का कारण बनती है।
कृषि महाविद्यालय भुसावर के डीन डॉ. उदय भान सिंह ने आधुनिक तकनीक-विकास या विनाश विषय पर आयोजित सेमीनार में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक अच्छा चालक कार चलाते समय एक्सीलेटर और ब्रेक में संतुलन रखकर कार को गति देता है। उन्होंने बताया कि आज के तीव्र तकनीकी विकास ने मानव को सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन एवं रहन सहन की तमाम सुविधायें प्रदान की है, साथ ही इससे पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वन एवं वन्य जीवों का क्षरण, प्राकृतिक आपदाओं में बढ़ोतरी, समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव, बढ़ता प्लास्टिक कचरा, केमिकल और पेस्टीसाइड के प्रयोग से मानव में नित नई बीमारियों का आक्रमण, जहरीली हवा से घुटता दम आदि समस्याओं के साथ मानवीय मूल्यों का ह्मस भी हुआ है। उन्होंने कहा कि तकनीकी पर मानव की अत्यधिक निर्भरता के कारण मानसिक गुलामी भी निरन्तर बढ रही है। आधुनिक युग कृत्रिम बुद्धिमता का है, इसका ज्यादा प्रयोग मानव को मानसिक रुप से पंगु बना सकता है। हमें आधुनिक तकनीकों का प्रयोग उनके नकारात्मक प्रभावों को ध्यान में रखकर करना चाहिए, ताकि हम विकास को मानव हितकारी बना सके। डॉ. राहुल कुमार ने कहा कि तकनीकी विकास में मानव मूल्यों का समावेश होना चाहिए। डॉ. शंकर लाल यादव ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के दुरूपयोग को रोकने के लिए कानूनी प्रतिबन्धो की आवश्यकता है। इस अवसर पर कालेज स्टाफ व विद्यार्थी उपस्थित थे।
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