गोविंदगढ़ में जल जीवन मिशन अटकाः इंदपुर के ग्रामीण 2 किमी दूर से ला रहे पानी, योजना का लाभ नहीं
महिलाओं को रोजमर्रा के कामों में हो रही दिक्कत..... ग्रामीण बोले- मीठा पानी तो दूर, खारे पानी भी नहीं मिल रहा
गोविंदगढ़ (अलवर) केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (JJM) योजना, जिसका लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण घर में नल से स्वच्छ पानी पहुंचाना है, उसके कार्यान्वयन में अलवर के गोविंदगढ़ स्थित इंदपुर गांव में भारी देरी हो रही है। लगभग 3000 की आबादी वाले इस गांव में योजना अप्रैल 2025 में स्वीकृत होने के बावजूद, अभी तक कार्य प्रारम्भ नहीं हो पाया है, जिसके कारण ग्रामीणों में गहरा रोष है।
योजना का कार्य शुरू न होने के कारण गांव की महिलाएं लगभग 2 किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार पानी को लेकर महिलाओं के बीच झगड़े भी हो जाते हैं।
सुनीता शर्मा, सावित्री देवी, फरीदा, किरण देवी, पप्पी और मौसम देवी जैसी ग्रामीण महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें इस महत्वपूर्ण सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि सुबह बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करें या पानी लेने जाएं, यह एक बड़ी चुनौती है। एक बुजुर्ग महिला ने अपनी व्यथा बताते हए कहा कि वद्धावस्था में उसे पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
इंदपुर गांव में खारे पानी की समस्या पहले से है, लेकिन जल जीवन मिशन के तहत अभी तक यहां कोई नया बोरवेल नहीं किया गया है। ग्रामीण रामसिंह जाटव, कर्म चंद सैनी, हुकम शर्मा, असलम खान और अजय खाम्बरा का कहना है कि "मीठा पानी तो दूर, खारे पानी का भी लाभ यहां नहीं मिल रहा है"।
ग्रामीणों ने इस देरी का सीधा आरोप सरपंच की निष्क्रियता पर लगाया है। अजय खाम्बरा ने बताया कि पानी की टंकी और घर-घर पानी पहुंचाने की स्वीकृति को काफी समय बीत चुका है, फिर भी कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, भूमि विवाद भी परियोजना में देरी का एक कारण है।
निशा मीना, कनिष्ठ अभियंता, जलदाय विभाग, ने बताया कि भूमि विवाद के कारण कार्य रुका हुआ है। उनके अनुसार, पूर्व में जहानपुर गांव में भूमि चिन्हित की गई थी, लेकिन वहां विवाद हो जाने के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया। अब इंदपुर सरपंच के द्वारा अभी तक कोई नई भूमि चिन्हित कर विभाग को नहीं दी गई है, जहां पर JJM के तहत बोर एवं पानी की टंकी का निर्माण कराया जा सके।