माली ने जताया निर्माण डीएलसी बढ़ाने का विरोध
भीलवाड़ा : राजकुमार गोयल
भीलवाड़ा 21 नवम्बर। राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही आरसीसी निर्मित पक्के मकानों व फ्लेटों की डीएलसी रेट में जबरदस्त बढ़ोतरी की हैं।
निर्माण डीएलसी की दरों में एक साथ 50 प्रतिशत बढ़ोतरी को लेकर स्टेट फेडरेशन ऑफ यूनेस्को एसोसिएशन इन राजस्थान के प्रदेश संयोजक गोपाल लाल माली ने विरोध दर्ज कराते हुए राज्य सरकार के निर्णय को गलत बताया। उन्होंने बताया कि आम आदमी जो मकान व फ्लेट खरीदना चाहते हैं उन पर निर्माण डीएलसी दरें बढ़ाने से दोहरी मार पड़ेगी। एक तरफ केंद्र सरकार प्रत्येक परिवार को घर मुहैया कराने के लिए रियायतें दे रही हैं दूसरी तरफ निर्माण डीएलसी रेट में 50 प्रतिशत से भी अधिक वृद्धि आम आदमी की जेब पर भारी पड़ेगी। वहीं माली ने राज्य सरकार से डीएलसी दरें बढ़ाने के निर्णय पर पुर्नविचार करने की मांग के साथ कहा कि आज भी कोई भी सरकारी हो या प्राइवेट कहीं पर भी 1800 रुपए की लागत का निर्माण नहीं किया जा रहा है। आज भी अधिकतम निर्माण के लागत हजार से ₹1200 तक की ही आती है। और सरकारी टेंडर भी ईसी रेट में या इससे भी कम लगाये जा रहे हैं, तो फिर अचानक एक साथ 1800 सो रुपए डीएलसी करने का राज्य सरकार द्वारा लिया गया निर्णय उचित नहीं है।
माली ने यह भी कहा कि एक साल में दो बार पहले ही जमीन व प्लाटों की डीएलसी दरें राज्य सरकार बढ़ा चुकी है। अब निर्माण डीएलसी बढ़ाना सीधे-सीधे जनता की जेब काटने जैसा है। प्रदेश और देश की जनता पहले ही महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी से परेशान है। हर चीज महंगी हो चुकी है। अब डीएलसी दरें बढ़ने से मकान, दुकान, फ्लैट खरीदना आम आदमी के लिए महंगा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा निर्माण (मकान) डीएलसी के साथ व्यावसायिक और औद्योगिक शेड की रेट बढ़ाने को लेकर आम जन में भी भारी रोष व्याप्त है
पहले और अब में अंतर - जैसा कि पहले 1000 फीट निर्मित मकान की रजिस्ट्री 1200 रुपये फिट के हिसाब से कराने पर 8 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन फीस से 96,000 रूपये लगते थे, अब उसी 1000 फीट निर्मित मकान की रजिस्ट्री कराने पर 1,44,000 हजार रूपये देने होंगे, जो कि किसी भी हाल में व्यवहारिक नहीं है।
राज्य सरकार की दोहरी नीति
सरकार द्वारा जब कोई भी सिविल (निर्माण) कार्य का टेंडर दिया जाता है तो वह 800 से ₹1000 के बीच ही रहता है। और इस रेट के अंदर वर्तमान में भी सरकार के कई कार्य चल रहे हैं जब सरकार ठेकेदारों को हजार 800 रुपए से ज्यादा निर्माण लागत नहीं मानती तो फिर यह 1800 सो रुपए आम आदमी से निर्माण रजिस्ट्री चार्ज करना सरकार की दोहरी नीति है।