होली स्नेह मिलन समारोह एवं कवि सम्मेलन आयोजित
जो अपने कर्मों के वल पर नया मार्ग दिखाता है। उनका अभिनंदन होता है और सदा होता है बंदन। अशोक धाकरे
रूपबास, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) वीरांगना रूप कवर जन सांस्कृतिक मंच रूपबास द्वारा होली स्नेह मिलन समारोह एवं कवि सम्मेलन वरिष्ठ साहित्यकार एवं राष्ट्रीय कवि अशोक धाकरे के मुख्य आतिथ्य एवं यादवेंद्र रावत प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में तथा मंच के संरक्षक एवं शिक्षक नेता हरिशंकर शर्मा व डॉक्टर अशोक शर्मा सामरी विशिष्ट अतिथि के सानिध्य में आदर्श विद्या मंदिर रूपवास में आयोजित किया गया।
अतिथियों द्वारा मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर माल्यार्पण किया गया। डॉक्टर इस्लाम खानवी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।अतिथियों का स्वागत साफा बांधकर एवं माल्यार्पण कर तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर किया ।कवि सम्मेलन में ओज, हास्य, श्रृंगार , भक्ति व वीर रस की कविताओं में होली के गीत व यूजीसी को लेकर कविताओं के माध्यम से सरकार पर कडा प्रहार कर भविष्य के लिए सावधान रहने की चेतावनी दी।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ बाल कवि प्रणय शर्मा यश ने कविता के माध्यम से कहा ऐसी जहरीली हवा में फूल कैसे मुस्कुराए, मातमी मौसम में फूल कैसे मुस्कुराए सुना कर स्रोताओं से तालियां बजवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय कवि अशोक धाकरे ने कविता के माध्यम से कहा जो अपने कर्मों के बल पर नया मार्ग दिखाता है, उनका अभिनंदन होता है और सदा होता है बंदन,पीछे जग उनके चलता है वे जग को महकाते हैं। कविता सुनकर श्रोताओं ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। कवि मनोज खंडूजा ने कहा यू सी सी की बात कही थी, फिर यूजीसी दियो लगाय कविता सुनाई। संयोजक कवि ज्ञानी राम अज्ञानी ने कहा सखी यह ब्रज की होरी है। इनमें को नंदलाल कौन बृजभान किशोरी है। डॉक्टर इस्लाम खानवी ने कविता के माध्यम से कहा की धर्म विरुद्ध होकर भी कौरव अपने लक्ष्य पार जाते हैं। कृष्ण अगर यह चाल ना चलते पांडव वही हार जाते। वरिष्ठ कवि गीतम सिंह परमार ने होली के अवसर पर गीत के माध्यम से श्रोताओं को होली खेलने को मजबूर कर दिया तथा कहा ग्वाल बाल सब सखा जोरि ब्रज मारौ आयौ है। बरसाने में नंदलाल हुरहारौ आयौ हैं। भक्ति रस के वरिष्ठ कवि द्वारकाधीश विरही ने कविता के माध्यम से कहा कैसे खेल फाग श्याम बिन आली,सखा श्याम बिनु खेली जावे होरी। कविता सुनाकर श्रोताओं के नैनों में आशु धारा वहा दी। ओज के कवि आनंद प्रकाश आनंद ने कहा मरुस्थल में देवदार खोजने चला पानी में चित्र विचित्र खोजने चला। कवि संजय हिंदुस्तानी ने कहा कोई शंका तेरे मन भी पलने लगेगी।आग सी हृदय में भी जलने लगेगी सुन कर स्रोतों से तालियां बजवाई।डॉ अशोक शर्मा ने कविता के माध्यम से कहा कि उदित रवि के पूर्व ही थी, निशि दिवस में ढल गई। सौंदर्य अभिशापित हुआ, प्रस्तर शिला वह बन गई। कवि हेमेंद्र परमार ने फागुन गाए प्रेम का मधुर रसीला रंग तथा विकास बृजवासी ने देर तक सोचा है बृजवासी यह हमने आज फिर ,क्या है कीमत जिंदगी अब मुस्कुराने के लिए। बालकवि कौशल गौड ने कहा मुझे माफ करना विद्वानों मैं बालक नादान हूं तथा अंकित, सूरज कुशवाह, अंकित गोला ,देवेंद्र परमार ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। युवा कवि योगेश कौशिक ने यूजीसी पर कड़ा प्रहार करते हुए कविता के माध्यम से कहा सवर्णों को जन्म जाति अपराध घोषित किया।हिंदू एकता का मंत्र तार -तार हो गया। प्रधान की प्रधानता ने दिया यूजीसी एक्ट। देश का प्रधान आज शर्मसार हो गया। कविता पर खूब तालियां बटोरी तथा श्रोताओं ने यूजीसी एक्ट सरकार से वापस लेने की मांग उठाई। संचालन युवा कवि योगेश कौशिक ने किया। इस अवसर पर हेमेंद्र वर्मा, अनुराग चंसौरिया, यादराम, ओमकार शुक्ला,प्रताप दत्तात्रेय, ओम प्रकाश परमार, गोपेश शर्मा आदि उपस्थित।