15 मार्च से थम जाएंगी शहनाइयां, रुक जाएंगे शुभ कार्य
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) सनातन धर्म में खरमास का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास की अवधि में सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूर्णतः विराम लग जाता है। 15 मार्च से खरमास की शुरुआत होने जा रही है। जिसके बाद अगले एक महीने तक विवाह, उपनयन संस्कार, मुंडन, गृह निर्माण और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित रहेंगे।
कब और कैसे लगता है खरमास
ज्योतिषाचार्य पंडित लोकेशकुमार ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव बृहस्पति की राशियों (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं तो उस काल को खरमास या मास कहा जाता है। चूंकि सूर्य देव अपने गुरु बृहस्पति की सेवा में लग जाते हैं, इसलिए उनका प्रभाव कम हो जाता है। इस समय किए गए मांगलिक कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। साल में दो बार खरमास लगता है। एक बार जब सूर्य धनु राशि में जाते हैं और दूसरी बार जब वे मीन राशि में प्रवेश करते हैं ।
मीन संक्रांति और समय का अंतर
पंडित जी ने बताया कि इस वर्ष सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। मीन संक्रांति का यह क्षण 14 मार्च 2026 की अल सुबह 3:38 बजे से लेकर शाम लगभग 5:30 बजे के बीच रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अलग-अलग स्थानों के अक्षांश और देशांतर में अंतर होने के कारण सूर्योदय का समय अलग होता है।इसलिए विभिन्न क्षेत्रों के पंचांगों में समय का मामूली अंतर देखा जा सकता है।
पंचांग के अनुसार खरमास का विधिवत प्रारंभ 15 मार्च 2026 से हो रहा है। इस दौरान एक महीने तक किसी भी प्रकार के संस्कार नहीं किए जा सकेंगे। हालांकि पंडित ने यह भी स्पष्ट किया कि खरमास में नियमित पूजा-पाठ और व्रत आदि पर कोई रोक नहीं होती। इसी अवधि में चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ होगा। चैती छठ जैसे पावन पर्व भी मनाए जाएंगे। धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत सुख-समृद्धि से जुड़े मांगलिक कार्य नहीं होंगे।
खरमास का समापन
खरमास का समापन 13 अप्रैल 2026 को दोपहर लगभग 12:00 बजे होगा। जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। 14 अप्रैल से पुनः शहनाइयां गूंजने लगेंगी। सभी रुके हुए मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जो लोग खरमास के नियमों का उल्लंघन कर शुभ कार्य करते हैं उन पर ग्रहों का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।और जीवन में नकारात्मकता बढ़ती है।