उदयपुर CMHO डॉ. बामणिया की बढ़ी मुश्किलें: भ्रष्टाचार के मामले में राज्य सरकार ने दी ACB जांच को हरी झंडी
उदयपुर। उदयपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. शंकरलाल बामणिया के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन संयुक्त सचिव निशा मीणा ने आदेश जारी कर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को डॉ. बामणिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विस्तृत जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दे दी है।
मंत्री की मंजूरी के बाद जारी हुए आदेश एसीबी के डीआईजी (प्रथम) डॉ. रामेश्वर सिंह ने डॉ. बामणिया के खिलाफ पद के दुरुपयोग और टेंडर प्रक्रियाओं में अनियमितताओं की शिकायतों के आधार पर सरकार से अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की धारा 17-ए के तहत किसी भी लोक सेवक के खिलाफ जांच से पहले सक्षम अधिकारी की अनुमति अनिवार्य है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री से पूर्वानूमोदन (अप्रूवल) मिलने के बाद अब यह आदेश जारी किए गए हैं।
पद की खींचतान के बीच बढ़ा विवाद गौरतलब है कि वर्तमान में उदयपुर में दो CMHO कार्यरत हैं। डॉ. अशोक आदित्य के पास विभागीय पावर हैं, जबकि डॉ. शंकरलाल बामणिया राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर अपने पद पर बने हुए हैं। एसीबी की जांच रिपोर्ट और आरोप-पत्रों के आधार पर अब ब्यूरो डॉ. बामणिया की संपत्तियों और उनके कार्यकाल के रिकॉर्ड खंगालने की तैयारी में है।
गिरफ्तारी की भी संभावना शासन संयुक्त सचिव द्वारा जारी पत्र की प्रति महानिदेशक (ACB) को भेज दी गई है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान यदि पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो एसीबी नियम 13 के तहत कार्रवाई करते हुए डॉ. बामणिया को गिरफ्तार भी कर सकती है। इस आदेश के बाद उदयपुर के चिकित्सा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
एसीबी की प्राथमिक जांच में सही पाए गए तथ्य एसीबी ने सरकार को भेजे पत्र में स्पष्ट किया था कि लोक सेवक द्वारा शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में की गई गड़बड़ियों का शुरुआती परीक्षण करने पर मामला 'विस्तृत जांच' के योग्य पाया गया है। अब ब्यूरो टेंडरों से जुड़ी फाइलें और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेगा।