रेबीज का खौफनाक रूप, कुत्ते की तरह भौंकने लगा मासूम; वैक्सीन का कोर्स अधूरा छोड़ना पड़ा भारी
कुत्ता काटने के 4 महीने बाद भौंकने लगा लड़का, जादू-टोना समझ जाड़-फूँक के लिए ले गए पिता, लोगों ने अस्पताल पहुंचाया
मिर्जापुर (शशि जायसवाल) उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में कुत्ता काटने के 4 महीने बाद 17 साल का लड़का भौंकने लगा। परिवार को लगा कि किसी ने जादू-टोना कर दिया है। वे लोग 14 मार्च (शनिवार) की शाम बच्चे को लेकर मंदिर के पुजारी के पास पहुंच गए। भीड़ देखते ही लड़का जोर-जोर से भौंकने लगा और भूत-भूत चिल्लाने लगा। उसके मुंह से लार टपकने लगी।
यह देखकर आसपास के लोग जुट गए। लोगों ने झाड़-फूंक की बजाय डॉक्टर के पास ले जाने की सलाह दी। फिर डायल- 108 पर फोन कर एंबुलेंस बुलाई गई। लड़के को अस्पताल भेजा गया। स्थानीय अस्पताल के डॉक्टर ने रेबीज की आशंका को देखते हुए वाराणसी रेफर कर दिया।
डॉक्टरों ने बताया- बच्चे को रेबीज के 2 इंजेक्शन लगे थे, लेकिन परिवार वालों ने तीसरा इंजेक्शन नहीं लगवाया था। कोर्स पूरा नहीं होने से वह रेबीज का शिकार हो गया। पूरा मामला कछवां थाना क्षेत्र का है। जहां जमुआ चौराहे के पास श्रीराम-जानकी मंदिर है। शनिवार शाम जोगीपुरवा के गुरु नानक अपने छोटे भाई को गोद में लेकर झाड़-फूंक कराने पहुंचे। साथ में उनके पिता भाईलाल भी थे।
पिता ने लोगों के पूछने पर बताया- 4 महीने पहले बेटा अपनी ननिहाल गया था। वहां उसे कुत्ते ने काट लिया था। उस समय एक इंजेक्शन प्राइवेट क्लिनिक में और दूसरा सीएचसी कछवां में लगवाया गया। लेकिन, तीसरा इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने से नहीं लग पाया।
13 मार्च (शुक्रवार) को अचानक बेटे के सिर में तेज दर्द शुरू हुआ। इसके बाद वह डरने लगा और अजीब हरकतें करने लगा। भौंकने लगा और पानी देखकर डरने लगा। वह बार-बार डर रहा था। भूत-भूत कह रहा था। हमें लगा किसी ने जादू-टोना कर दिया है। इसलिए हम झाड़-फूंक कराने मंदिर ले आए। मंदिर में भीड़ देखकर उसकी हालत और बिगड़ गई।
बच्चे की हालत देखकर स्थानीय निवासी बद्री सिंह ने 108 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस बुलाई। उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कछवां भेजा गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद वाराणसी रेफर कर दिया।
6 भाई-बहनों में सबसे छोटा है पिता भाईलाल ने बताया- मेरी पत्नी की मौत हो चुकी है। मुझे भी 4 साल पहले लकवा मार दिया था। तभी से बड़ा बेटा नानक मोबाइल रिपेयरिंग और टाइल्स लगाकर परिवार का पालन-पोषण करता है। यह बेटा 3 भाई और 3 बहनों में सबसे छोटा है। वह गांव की एक चाय की दुकान में काम करता था। मंझला बेटा मानसिक रूप से बीमार है। तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है।
इस मामले में मिर्जापुर के मंडलीय अस्पताल के CMS डॉक्टर सचिन किशोर ने कहा, रेबीज के लक्षण एक बार आ जाते हैं तो मरीज को मैनेज करना, लाइफ को सेव करना बहुत मुश्किल होता है। बच्चे में रेबीज के लक्षण डेवलप हो चुके हैं, उसकी हालत सीरियस है।
रेबीज एक खतरनाक वायरल संक्रमण है, जो मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। यह लाइसावायरस नामक वायरस से होता है और आमतौर पर संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर या अन्य जानवर के काटने या खरोंच से फैलता है। दुर्लभ मामलों में अंग प्रत्यारोपण से भी संक्रमण हो सकता है। समय पर टीकाकरण न होने पर वायरस शरीर में फैलकर दिमाग पर हमला करता है, जिससे व्यवहार में बदलाव, डर, बेचैनी, पानी से घबराहट और झटके जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, मनुष्यों में लक्षण प्रकट होने के बाद रेबीज लगभग हमेशा घातक साबित होता है, इसलिए जानवर के काटते ही तुरंत वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी है। सही समय पर उपचार शुरू कर दिया जाए तो संक्रमण को रोका जा सकता है। दुनिया के कुछ देशों में रेबीज नहीं पाया जाता, लेकिन कई जगह चमगादड़ों में इससे संबंधित वायरस मिलते हैं, जो इंसानों के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए किसी भी जानवर के काटने को हल्के में न लेकर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना ही सबसे सुरक्षित उपाय माना जाता है