गणगौर का त्यौहार 21 मार्च को घर-घर होगी शंकर पार्वती की होगी पूजा
वैर (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) वैर कस्बे में इस समय गणगौर पूजा की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी है, हलवाईयों द्वारा गुना तैयार किए जा चुके हैं । जिन्हें गणगौर पूजन करने वाले खरीदने में लगे हुए हैं । हलवाई हेमंत कुमार ने बताया कि मीठे गुना गणगौर पूजन एवं मंसने के काम आते हैं । जिनका भाव 140 रु से लेकर 150 रु तक का चल रहा है । आज कन्या शिव गोरा के रुप रख कर बाजार में निकलेगी। और घर-घर में उनका पूजन कर आशीर्वाद लिया जाएगा । वैर सहित उपखण्ड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में यूं तो कई पर्व, त्यौहार हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार समय-समय पर मनाएं जाते हैं उपखंड क्षेत्र में विभिन्न धर्म के लोग रहते हैं। इन्हीं परम्पराओं में शुमार सोलह दिनों तक अनवरत चलने वाला एवं खेलने वाला ऐतिहासिक पारम्परिक त्यौहार गणगौर पूजन में विभिन्न समाजों की महिलाएं अपने पति अथवा होने वाले पति को लेकर भगवान शिवजी (ईसर) और माता पार्वती (गौरा) की पूजा अर्चना कर मनोकामनाएं मांगी जाती है।
वहीं गणगौर एक और बजह से जाना जाता है जहां इस पर्व में ख़ास मिठाई बनाई जाती है,, गुना। जो कि साल भर में एक बार ही मिलता है। ज़हां महिला श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती जी की पूजा अर्चना करते हुए भगवान से परिवार में सुख-शांति समृद्धि एवं क्षेत्र में खुशहाली की मनोकामनाएं मांगी जाती है। वहीं कस्बे के बाबा मनोहर दास जी महाराज मन्दिर स्थित मिष्ठान भंडार, मुख्य बाजार, नया बस स्टैंड,पुरानी अनाज मण्डी सहित विभिन्न बाजारों में हलवाई गणगौर पूजन में माता पार्वती जी और शिव जी को भोग लगाने के लिए एवं सुहाग के प्रतीक पारम्परिक ऐतिहासिक मिठाई गुना बनाने में जुट गए हैं। जहां वेरोज़गार युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। गणगौर पर्व की शुरुआत होली के अगले दिन से शुरू हो जाती है और सोलह दिनों तक अनवरत चलती है,, लेकिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर गणगौर पर्व का खास महत्व होता है,, जहां इस वर्ष गणगौर पूजा शनिवार 21 मार्च 2026 को की जाएगी। वहीं उन्होंने बताया कि गणगौर शब्द का अर्थ शिव और गौरी से मिला हुआ है,, इस लिए यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, वैवाहिक जीवन और समपर्ण को दर्शाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत रखकर पूजा अर्चना करती है।