हरिहर शिवमहापुराण कथा: कोटड़ी में गूंजे 'हर-हर महादेव' के जयकारे, पार्थिव शिवलिंग पूजन में उमड़े श्रद्धालु
पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन कलयुग का सबसे बड़ा शिवपूजन का साधन: पं. विष्णुश्री कृष्णतनय महाराज
गुरला/कोटड़ी (बद्री लाल माली)। कोटड़ी क्षेत्र में श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित हरिहर शिवमहापुराण कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कथा वाचक पं. विष्णुश्री कृष्णतनय महाराज ने पार्थिव शिवलिंग पूजन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कलयुग में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए मिट्टी से निर्मित पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और विधि-विधान से पूजन करना सबसे सरल, श्रेष्ठ और अत्यंत प्रभावशाली साधन है। इससे साधक के सभी पापों का क्षय होता है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि का वास होता है।
महाराजश्री ने बताया कि भगवान शिव केवल सच्ची श्रद्धा, निष्कपट भक्ति और विश्वास से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग का अनुष्ठान करने से अनेक यज्ञों और तीर्थों के दर्शन जैसा पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने प्रत्येक परिवार से आह्वान किया कि वे श्रावण मास में कम से कम एक बार पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव का अभिषेक, रुद्रपाठ और पूजन अवश्य करें।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंग बनाकर महादेव का अभिषेक किया। पूरा पांडाल और आसपास का क्षेत्र 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।

