पेंशनर्स के विरद्ध जारी वैद्यता अधिनियम 2025 को वापस लेने की मांग, आज मनाया काला दिवस

Mar 25, 2026 - 19:52
 0
पेंशनर्स के विरद्ध जारी वैद्यता अधिनियम 2025 को वापस लेने की मांग, आज मनाया काला दिवस

जहाजपुर  (बृजेश शर्मा) राजस्थान पेन्शनर समाज उपशाखा- जहाजपुर  ने आज न प्रधानमंत्री भारत सरकार, को एक ज्ञापन भेजा। जिसमें  वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पेंशनर्स के विरद्ध जारी वैद्यता अधिनियम 2025 को वापस लेने की मांग की गई है। पेंशनर समाज के सदस्यों ने बस स्टैंड से उपखंड कार्यालय तक जुलूस निकाला और उपखंड अधिकारी राजकेश मीणा को प्रधानमंत्री के नाम पर ज्ञापन सोपा।
पेंशनर समाज के अध्यक्ष भंवरलाल बंडेला ने बताया किज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री भारत सरकार से अनुरोध किया गया है कि एक ऐसा अधिनियम, जो इस सिद्धांत को मान्यता देता है कि केन्द्र सरकार को अपने पेंशनर्स का वर्गीकरण करने और उनके बीच अन्तर बनाये रखने का अधिकार है, 29 मार्च 2025 से लागू हो गया है। इसे बिना पूर्व सूचना के वित्त विधेयक के भाग के रूप में पेश किया गया और 25 मार्च 2025 को लोकसभा द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है।  यदि यह अधिनियम अक्षरशः लागू होता है तो पेंशनभोगियों की सेवानिवृत्ति की तिथि, पेंशन पात्रता के संबंध में वर्गीकरण और उनके बीच अन्तर का आधार होगा, जिससे केन्द्रीय वेतन आयोग (या किसी भी वेतन आयोग) के कार्यकाल से पहले के पेंशनर्स वेतन आयोग की सिफारिशों के लाभ से वंचित हो जाएगें। 
मौजूदा पेंशनभोगियों को इस कठिन समय में पेंशन वृद्धि का लाभ ना मिलने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।, यह सरकार के घोषित उद्देश्यों के विरूद्ध है कि वह अपने सभी नागरिकों को सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास करती है। यह भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक निर्णयों के भी विरूद्ध है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली ने न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ के डी०एस० नाकरा और अन्य बनाम भारत संघ मामले में सिविल याचिका संख्या 5939-41/1980 में अपने ऐतिहासिक फैसले में, जिसे नकारा फैसला के नाम से जाना जाता है. कहा था-"पेंशन एक सामाजिक कल्याणकारी व्यवस्था है. जो उन लोगों को सामाजिक आर्थिक न्याय प्रदान करती है, जिन्होंने अपने जीवन के सुनहरे दिनों में नियोक्ता (केन्द्र / राज्य सरकार) के लिए अथक परिश्रम किया है,

इस आश्वासन के साथ कि वृद्धावस्था में उन्हें बेसहारा नहीं छोडा जाएगा।" इस निर्णय में यह भी स्पष्ट किया गया था कि पेंशन योजना का उद्देश्य पेंशनभोगियों को अभावमुक्त, सम्मानजनक, स्वतंत्र और सेवानिवृत्ति से पहले के स्तर के समकक्ष जीवन स्तर प्रदान करना है। 
ज्ञापन में मांग की गई है कि जिस प्रकार सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग द्वारा 01-01-2016 से पहले सेवानिवृत्त हुए और 01-01-2016 को या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए पूर्व पेंशनरों के बीच समानता की सिफारिश की गई थी और केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष जनवरी 2016 से इसे स्वीकार किया गया था, उसी प्रकार आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग में भी इस सिद्धान्त को यथावत रखा जावे।
वित्त विधेयक के रूप में यह काला अधिनियम लोकसभा में 25 मार्च 2025 को पारित हुआ था जिसे जारी हुए एक वर्ष पूरा हो रहा है। अतः इस अधिनियम के विरोध में अखिल भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, दिल्ली ने भारत वर्ष के समस्त राज्यों में 25 मार्च 2026 को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है। यह कदम इस कुख्यात अधिनियम के कारण उत्पन्न हमारी परेशानियों की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करने के लिए उठाया गया है।
अतः उक्त अधिनियम के विरोध में राजस्थान पेंशनर समाज द्वारा  25 मार्च 2026 को काला दिवस के रूप में मानते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम ज्ञापन प्रस्तुत कर अनुरोध है कि केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम अधिनियम को वापस लेने के लिए तत्काल कदम उठाए।
ज्ञापन देने के दौरान पेंशनर समाज के मंत्री बालकृष्ण जैन, रामदेव सोयल, ललिता भारद्वाज ,विमलेश शर्मा, कोषाध्यक्ष चंद्र प्रकाश जोशी, सत्येंद्र पंचोली, बजरंग सिंह सोलंकी, विनोद भट्ट, गीता उपाध्याय, महावीर शर्मा, ओमप्रकाश काटिया, बन्नालाल जाट आदि उपस्थित रहे। 

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क बुलंद आवाज के साथ निष्पक्ष व निर्भीक खबरे... आपको न्याय दिलाने के लिए आपकी आवाज बनेगी कलम की धार... आप भी अपने आस-पास घटित कोई भी सामाजिक घटना, राजनीतिक खबर हमे हमारी ई मेल आईडी [email protected] या वाट्सएप न 8094612000 पर भेज सकते है हम हर सम्भव प्रयास करेंगे आपकी खबर हमारे न्यूज पोर्टल पर साझा करें। हमारे चैनल GEXPRESSNEWS से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद................