माताजी की स्मृति में प्रसादी को बनाया सामाजिक मेलमिलाप का मंच
भीलवाडा (बृजेश शर्मा) तहनाल ग्राम पंचायत में 106 वर्षीया स्वर्गवासी सोहनदेवी लादूलाल लढ़ा की स्मृति में रखी गई श्री चारभुजानाथ महाराज की प्रसादी सामाजिक सद्भाव और मेलमिलाप को मजबूत करने का बड़ा अवसर बनी। अहमदाबाद निवासी और तहनाल मूल के हेमराज लढ़ा ने अपनी माताजी के निधन के बाद यह संकल्प लिया कि उनकी स्मृति में ऐसा आयोजन किया जाए, जो पुरातन परंपराओं को पुनर्जीवित करते हुए समाज में एकता, प्रेम और सामाजिक स्नेह को फिर से प्रगाढ़ करे।
125 गांवों के माहेश्वरी बंधु और सभी जाति–वर्ग के परिवारों को आमंत्रण
इस प्रसादी में शाहपुरा, जहाजपुर, हुरड़ा, मांडलगढ़, कोटड़ी और काछोला तहसील क्षेत्र के करीब 125 गांवों के माहेश्वरी समाज के परिवारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। साथ ही तहनाल ग्राम पंचायत क्षेत्र की सभी जाति–बिरादरी के परिवारों को भी सपरिवार निमंत्रण दिया गया, जिससे सामाजिक मेलजोल और आपसी सौहार्द का संदेश व्यापक रूप से फैल सके।
एकता, सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देने का उद्देश्य
हेमराज लढ़ा ने बताया कि इतने बड़े स्तर पर समाजबंधुओं को आमंत्रित करने का मुख्य उद्देश्य सभी को एक जाजम पर बिठाकर भाईचारा, स्नेह और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करना है। उनका कहना है कि एक साथ बैठना न केवल प्रेम बढ़ाता है, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनने की भावना भी प्रबल करता है।
माताजी की स्मृति को संजोने की अनूठी पहल
हेमराज लढ़ा ने अपनी माताजी के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनकी स्मृति को स्थायी रूप देने के लिए वियतनाम से पत्थर मंगाकर जयपुर के कारीगरों से प्रतिमा भी बनवाई है। 106 वर्ष की आयु में स्वर्गवासी हुई सोहनदेवी के अंतिम समय तक नए दांत और बाल आ चुके थे तथा वे पूर्णतः स्वस्थ थीं, जो उनके जीवन की विशेषता बन गई।
भक्ति और मातृसेवा का उदाहरण
हेमराज लढ़ा, जो पेशे से ज्योतिष एवं वास्तुविद हैं, ने अपने घर पर मंदिर बनाकर पिछले 36 वर्षों से माताजी की अखंड ज्योत प्रज्वलित कर रखी है। उनकी मातृभक्ति और देवीभक्ति आज पूरे क्षेत्र में एक अनुकरणीय मिसाल बन चुकी है।
पूरे परिवार की सक्रिय भागीदारी
हेमराज लढ़ा के तीनों पुत्र—विकास, अभिषेक और रोहित लढ़ा—भी इस आयोजन में सक्रिय रूप से सहभागी बने हुए हैं। लंबे समय से अहमदाबाद में बसने के बावजूद परिवार ने अपनी मिट्टी और सामाजिक परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश इस आयोजन के माध्यम से दिया है।