श्रमिक दिवस विशेष: खाड़ी युद्ध की आग में झुलस रही भारतीय मजदूरों की तकदीर, लेखक मंगलचंद सैनी ने जताई चिंता
राजस्थान (सुमेरसिंह राव) श्रमिक दिवस के अवसर पर पूर्व तहसीलदार एवं लेखक मंगलचंद सैनी ने एक विशेष आलेख के माध्यम से खाड़ी देशों में जारी युद्ध और वहां कार्यरत भारतीय मजदूरों की दयनीय स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई बमबारी के बाद से खाड़ी देशों में युद्ध की त्रासदी ने भारतीय कामगारों के जीवन को संकट में डाल दिया है।
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आर्थिक रीढ़ पर चोट: खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय मजदूर कार्यरत हैं, जो देश के लिए हजारों करोड़ की विदेशी मुद्रा भेजते थे। युद्ध के कारण अब हजारों मजदूर बेरोजगार होकर वतन लौट रहे हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है।
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मौत के साये में जीवन: वहां फंसे मजदूर बमबारी के बीच शेल्टर हाउस में रहने को मजबूर हैं। हवाई यातायात बंद होने और आर्थिक तंगी के कारण वे वतन वापसी नहीं कर पा रहे हैं।
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अमानवीय शोषण: युद्ध के दौरान प्रतिदिन औसतन 20 भारतीय मजदूरों की मृत्यु हो रही है और उनके शव महीनों तक स्वदेश नहीं पहुँच पा रहे हैं। कई मजदूरों को पासपोर्ट जब्त कर बंधुआ मजदूर बना लिया गया है और उन्हें वेतन का भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा है।
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अमानवीय व्यवहार की पराकाष्ठा: लेखक ने चिंता व्यक्त की है कि अमेरिका द्वारा भारतीय मजदूरों को हथकड़ियों और बेड़ियों में जकड़कर जानवरों की तरह मालवाहक जहाजों में डिपोर्ट किया जाना वैश्विक स्तर पर एक दुखद दृश्य है।
निष्कर्ष एवं अपेक्षा: मंगलचंद सैनी ने श्रमिक दिवस पर वैश्विक समुदाय और सरकार से अपेक्षा की है कि इस गतिरोध को शीघ्र समाप्त किया जाए। उन्होंने कामना की है कि स्थितियां सामान्य हों ताकि भारतीय मजदूरों का भविष्य सुरक्षित हो सके और देश की अर्थव्यवस्था पुनः पटरी पर लौट सके।


