पक्षी हमारे मित्र ही नही ये हमारे जीवनदाता; वन जीव एवं पक्षी बचाओ अभियान का शुभारम्भ
हलैना (विष्णु मित्तल) वनखण्डी भक्त मण्डल,समृद्व भारत अभियान एवं वन प्रेमियों के द्वारा पर्यावरण की शुद्वता एवं मूक बधिर प्राणियों की रक्षा के लिए समृद्व भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता एवं बनखण्डी आश्रम के श्रीमहन्त महावीर गिरी के सानिध्यं में मनाए जा रहे वन जीव एवं पक्षी बचाओं अभियान के तहत कस्वा हलैना स्थित आस्था से भरपूर श्री बनखण्डी आश्रम पर पक्षियों को गर्मी में पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए परिण्डे लगाए गए। जिसका शुभारम्भ श्री स्वामी हरिदास सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्य राधाप्रसाद देव जू महाराज के मुख्य आतिथ्य एवं बनखण्डी आश्रम के श्रीमहन्त रविनाथदास महाराज की अध्यक्षता में हुआ,जबकि श्री ललित कुन्ज आश्रम वृन्दावन के महन्त मोहिनी बिहारी शरण महाराज एवं साघ्वी अनीता कुमारी विशिष्ठ अतिथि रहे। पीठाधीश्वर आचार्य राधाप्रसाद देव जू महाराज ने कहा कि पक्षी हमारे मित्र ही नही ये हमारे जीवनदाता भी है,जो पर्यावरण की शुद्वता,खेती-बागवानी,धरती की शोभा बढाने आदि में अहम भूमिक अदा करते है। हमें भी इनके जीवन पर ध्यान देकर पीने के पानी,चुग्गा,जीवन रक्षा आदि व्यवस्थाए उपलब्ध करानी चाहिए साथ ही शिकारियों से इनका बचाव भी। उन्होने कहा कि गर्मी के मौसम में पक्षियों को घर आंगन,धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों सहित खेत,जंगल,बाग बगीची आदि स्थान पर परिण्डे और डीपबोर के निकट अस्थाई प्याऊ बनाकर नित्य पानी,चुग्गा की व्यवस्थाए करे। बनखण्डी आश्रम के सन्त बलवीरदास महाराज ने कहा कि मूक बधिर प्राणियों की सेवा ही दुनिया की सबसे बडी सेवा है। आश्रम से निदेशक सीताराम गुप्ता के निदेशन में परिण्डे लगाओ पक्षी बचाओं अभियान के तहत परिण्डे लगाए गए। समृद्व भारत अभियान के प्रदेश प्रभारी पुनीत गुप्ता ने कहा कि संस्था के निदेशक सीताराम गुप्ता के निदेशन में प्रदेशभर में सन्त समाज,भामाशाह,समाजसेवी और वन प्रेमियों के सहयोग से वन जीव एवं पक्षियों को गर्मी के मौसम में पेयजल मुहेया कराया जा रहा है,जिसके लिए परिण्डे,अस्थाई प्याऊ,चुग्गा आदि की व्यवस्थाएं की जारी है। कस्वा हलैना के बनखण्डी आश्रम से वन जीव एवं पक्षी बचाओं अभियान की शुरूआत की गई। इस अवसर पर जगदीश सोंलकी,टीन्कू जिन्दल कपडा वाला,पूर्व पंच विनोद मित्तल,थानसिंह सिनसिनवार,विष्णु मित्तल,समाजसेवी कृष्णा देवी,अनीता गांगरोली आदि ने परिण्डे लगाए और वृन्दावन से आए सन्त समाज का सम्मान करते हुए 11-11 परिण्डे लगाने का संकल्प लिया।


