दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे बना 'डेथ ज़ोन': नियमों की धज्जियाँ उड़ने के बावजूद NHAI और जिम्मेदार विभाग मौन
राजगढ़ (अलवर/ अनिल गुप्ता)। देश के सबसे आधुनिक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का राजगढ़ (अलवर) खंड इन दिनों हादसों का केंद्र बनता जा रहा है। एक्सप्रेस-वे पर आए दिन हो रही मौतों और बढ़ती दुर्घटनाओं के बावजूद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और संबंधित विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं। एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा के दावों की पोल खोलते हुए प्रतिबंधित वाहन न केवल सरपट दौड़ रहे हैं, बल्कि अवैध पार्किंग भी हादसों को खुला निमंत्रण दे रही है।
नियमों की सरेआम अनदेखी: एक्सप्रेस-वे पर दोपहिया (बाइक) और तिपहिया वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित है, इसके बावजूद राजगढ़ क्षेत्र में 110 किमी/घंटा की रफ्तार से बाइक दौड़ती हुई देखी जा रही हैं। सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी के बाद भी नियमित मॉनिटरिंग और कार्रवाई न होने से वाहन चालकों में कानून का कोई भय नहीं रह गया है।
हादसों के प्रमुख कारण:
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प्रतिबंधित वाहनों का प्रवेश: बाइक और हल्के वाहनों के अवैध प्रवेश से तेज रफ्तार कारों का संतुलन बिगड़ रहा है।
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अवैध पार्किंग: एक्सप्रेस-वे के किनारे अवैध रूप से खड़े वाहन 'सड़क अवरोधक' बनकर बड़े हादसों का कारण बन रहे हैं।
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ओवर-स्पीडिंग: निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन कर रहे वाहनों पर कोई लगाम नहीं है।
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ट्रोमा सेंटर का अभाव: एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटना होने की स्थिति में दूर-दूर तक कोई ट्रोमा सेंटर या त्वरित उपचार केंद्र उपलब्ध नहीं है, जिससे घायल दम तोड़ देते हैं।
प्रशासन से जनता के सवाल: क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब NHAI ने स्पष्ट नियम लागू कर रखे हैं और जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो फिर अधिकारियों की नाक के नीचे ये उल्लंघन कैसे हो रहे हैं? एक्सप्रेस-वे के किनारे स्थित फेंसिंग टूटी हुई है, जहाँ से स्थानीय लोग प्रतिबंधित वाहनों को ऊपर चढ़ा रहे हैं।
मांग: स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि एक्सप्रेस-वे पर पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए, सीसीटीवी के जरिए ई-चालान की व्यवस्था सख्त हो और राजगढ़ के समीप अविलंब एक सर्वसुविधायुक्त ट्रोमा सेंटर की स्थापना की जाए, ताकि कीमती जानों को बचाया जा सके।


