'हाथों में रची मेहंदी, दुकानों पर उमड़ा घेवर का मिठास': लक्ष्मणगढ़ में धूमधाम से मनाया गया सिंजारा, आज रखा जाएगा अखंड सौभाग्य का हरियाली तीज व्रत
लक्ष्मणगढ़ में सिंजारे की जबरदस्त धूम: महिलाओं ने रचाई मेहंदी और किया सोलह श्रृंगार, आज रखा जाएगा हरियाली तीज का व्रत
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन। उपखंड क्षेत्र में हरियाली तीज की पूर्व संध्या पर शुक्रवार (14 अगस्त, श्रावण शुक्ल द्वितीया) को लोकपर्व 'सिंजारा' पारंपरिक उल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। सिंजारे को लेकर कस्बे के बाजारों से लेकर घर-आंगन तक खासा उत्साह देखने को मिला। सुहागिन महिलाओं और नवविवाहिताओं ने हाथों में सुंदर मेहंदी रचाकर, मायके व ससुराल से आए लहरिया वस्त्र और श्रृंगार सामग्री धारण कर इस पावन पर्व को मनाया।
शनिवार (15 अगस्त) को अखंड सौभाग्य का प्रतीक 'हरियाली तीज' का व्रत रखा जाएगा, जिसको लेकर महिलाओं ने सिंजारे के दिन से ही तैयारियां पूरी कर ली हैं।
बाजारों में उमड़ी भीड़, घेवर और लहरिया की रही मांग
सिंजारे के अवसर पर लक्ष्मणगढ़ कस्बे के मुख्य बाजारों में सुबह से ही चहल-पहल बनी रही। सौंदर्य प्रसाधन, चूड़ी मार्केट, कपड़ा दुकानों और हलवाइयों की दुकानों पर महिलाओं की भारी भीड़ नजर आई। विशेष रूप से सावन के पारंपरिक परिधान 'लहरिया' और सावन की प्रसिद्ध मिठाई 'घेवर व फेणी' की जमकर खरीदारी हुई। हलवाइयों ने भी तीज के त्योहार को देखते हुए विशेष प्रकार के घेवर तैयार किए हैं।
परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम
समय के साथ सिंजारा मनाने के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है। जहाँ ग्रामीण इलाकों में आज भी महिलाएं बाग-बगीचों में झूले झूलकर और पारंपरिक तीज-गीत गाकर सिंजारा मना रही हैं, वहीं शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में अब होटल, क्लब और किटी पार्टियों के जरिए 'लहरिया उत्सव' आयोजित किए जाने लगे हैं। इसके बावजूद मेहंदी, हरे वस्त्र और घेवर का पारंपरिक महत्व आज भी बरकरार है।
पीहर और ससुराल के रिश्तों की मिठास का प्रतीक
सिंजारा केवल खान-पान और श्रृंगार का पर्व नहीं है, बल्कि यह पीहर और ससुराल के बीच प्रेम, अपनापन और आत्मीयता का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार, नवविवाहिता का पहला सिंजारा ससुराल पक्ष से आता है, जबकि उसके बाद के वर्षों में पीहर से बेटी के ससुराल में सिंजारा (कपड़े, घेवर, श्रृंगार सामग्री) भेजा जाता है।
आज रखा जाएगा हरियाली तीज का व्रत
सिंजारे के बाद 15 अगस्त को सुहागिनें पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला रहकर माता पार्वती (गौरी स्वरूप) और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगी।

