डीग में जलझूलनी एकादशी पर रथ पर सवार होकर निकले शेषनागावतार लक्ष्मण जी; पुष्पवर्षा संग हुआ भव्य स्वागत
डीग (नीरज जैन)
जलझूलनी एकादशी के पावन अवसर पर मंगलवार को डीग शहर के ऐतिहासिक श्री लक्ष्मण मंदिर से शेषनाग के अवतार भगवान लक्ष्मण जी महाराज गाजे-बाजे व अगाध श्रद्धा के साथ नगर भ्रमण पर निकले।
विशेष साज-सज्जा के साथ निकला रथ
सजे-धजे आकर्षक रथ पर विराजमान भगवान लक्ष्मण जी महाराज का लवाजमा मंदिर परिसर से रवाना हुआ। नगर भ्रमण यात्रा शहर के मुख्य बाजार, घंटाघर, लोहा मंडी, पुरानी डीग, गोवर्धन गेट, किला गेट और पुराना बस स्टैंड होते हुए जल पूजन के लिए प्रसिद्ध रूपेश्वर महादेव मंदिर पहुंची। मंदिर पहुंचने पर महंत एवं श्रद्धालुओं ने भगवान की महाआरती उतारकर विशेष पूजा-अर्चना की। तत्पश्चात भगवान लक्ष्मण जी महाराज ने रूप सागर की ऐतिहासिक बुर्ज पर पहुंचकर वरुण देवता का विधि-विधान से पूजन किया।
पुष्पवर्षा और आरती से हुआ स्वागत
जल पूजन के बाद यात्रा गणेश मंदिर एवं पुरानी अनाज मंडी होते हुए पुनः लक्ष्मण मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह अपने घरों व दुकानों से पुष्पवर्षा कर भगवान की आरती उतारी और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया।
जलझूलनी एकादशी का धार्मिक महत्व
लक्ष्मण मंदिर के महंत पंडित मुरारी लाल पाराशर ने पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जलझूलनी एकादशी पर ही भगवान श्री कृष्ण के जन्म के 18वें दिन माता यशोदा ने उनका प्रथम जल पूजन किया था। इसी दिन को 'डोल ग्यारस' के रूप में भी मनाया जाता है, जिसके बाद ही धार्मिक संस्कारों की शुरुआत होती है।
महंतजी ने बताया कि शुक्ल व कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को चंद्रमा की 11 कलाओं का प्रभाव जीव मात्र पर पड़ता है, जिससे मन की चंचलता और शरीर की स्थिति में स्वाभाविक उतार-चढ़ाव आता है। इसी कारण उपवास के माध्यम से शरीर को साधने और इष्ट पूजा द्वारा मन को नियंत्रित रखने के लिए एकादशी व्रत का विधान बनाया गया है।

