सावधान: आपके नाम से जारी फर्जी सिम बन सकता है साइबर ठगी का जरिया, राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
जयपुर (राजस्थान) अगर आपके पहचान दस्तावेजों या बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग कर किसी ने आपके नाम पर फर्जी सिम जारी करवा लिया है, तो आप अनजाने में ही गंभीर साइबर अपराध की जांच के दायरे में आ सकते हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम आउटरीच, अनुसंधान एवं नवाचार शाखा (R4C) ने नागरिकों को सतर्क करते हुए इस संबंध में एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार आमजन को डिजिटल अपराधों से बचाने के लिए यह जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।
एडीजी (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह के अनुसार, साइबर ठग चोरी किए गए फोटो, पहचान पत्र अथवा बायोमेट्रिक डेटा का इस्तेमाल कर अनधिकृत सिम विक्रेताओं की मिलीभगत से नागरिकों के नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड एक्टिवेट करा लेते हैं। बाद में इन नंबरों का उपयोग ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और 'म्यूल अकाउंट्स' (फर्जी बैंक खाते) संचालित करने में किया जाता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए मुख्य अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है। इसके अलावा बैंक, आरबीआई या कस्टम विभाग के नाम से संदिग्ध ZIP फाइलें भेजकर नागरिकों के फोन व कंप्यूटर से डेटा चोरी करने का खेल भी चल रहा है।
- इस तरह दिया जाता है वारदात को अंजाम
साइबर ठग फर्जी तरीके से ई-केवाईसी करवाकर किसी व्यक्ति के नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी करवा सकते हैं। इसके बाद इस सिम का इस्तेमाल ऑनलाइन भुगतान एप्लीकेशन और फर्जी बैंक खातों को संचालित करने में किया जाता है। ठगी की रकम इन खातों में भेजकर उसे आगे स्थानांतरित किया जाता है, जिससे धनराशि के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
साइबर ठग बैंक स्टेटमेंट, आरबीआई अनुपालन, आयकर विभाग या कस्टम विभाग के नाम पर ई-मेल अथवा संदेश भेजकर ZIP फाइल भी डाउनलोड करवा सकते हैं। ऐसी संदिग्ध फाइल खोलने पर मोबाइल या कंप्यूटर मैलवेयर से संक्रमित हो सकता है। इसके जरिए चैट, पासवर्ड, महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य संवेदनशील डेटा चोरी किया जा सकता है। चोरी किए गए डेटा का इस्तेमाल आगे फर्जी कॉल, संदेश अथवा अन्य साइबर अपराधों में किया जा सकता है।
- अनजान नंबर मिले तो तुरंत उठाएं ये कदम
यदि आपके नाम पर ऐसा मोबाइल नंबर जारी मिला है जिसका आपने कभी उपयोग नहीं किया, तो तत्काल संचार साथी पोर्टल पर उसकी रिपोर्ट करें। साथ ही संबंधित टेलीकॉम कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क कर इसकी जानकारी दें।
यदि मामला साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा है तो संबंधित एसएमएस, स्क्रीनशॉट, ई-मेल, चैट और लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। ये सामग्री जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है।
- संचार साथी पोर्टल से ऐसे जांचें अपने कनेक्शन:
नागरिक घर बैठे भारत सरकार के 'संचार साथी' पोर्टल के जरिए यह पता लगा सकते हैं कि उनके नाम पर कितने सक्रिय मोबाइल नंबर चल रहे हैं:
- आधिकारिक पोर्टल पर जाकर TAF-COP (Know Mobile Connections in Your Name) विकल्प चुनें।
- अपना चालू मोबाइल नंबर दर्ज कर ओटीपी (OTP) के जरिए सत्यापन करें।
- स्क्रीन पर प्रदर्शित सूची में अपने सभी सक्रिय नंबरों की जांच करें।
- किसी भी अज्ञात या अनावश्यक नंबर को सीधे पोर्टल पर ही Report या Disconnect कर दें।
बचाव के जरूरी उपाय: सिम और केवाईसी के दौरान बरतें ये सावधानियां
पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे सिम कार्ड केवल अधिकृत टेलीकॉम स्टोर से ही खरीदें। सत्यापन के दौरान अपना मोबाइल किसी अज्ञात व्यक्ति के हाथों में न दें और बिना स्पष्ट वजह के बार-बार बायोमेट्रिक पंच करने से बचें। अपने गोपनीय पासवर्ड, ओटीपी और पहचान दस्तावेज अजनबियों से साझा न करें।
- धोखाधड़ी होने पर तुरंत यहां करें संपर्क:
किसी भी संदिग्ध गतिविधि या फर्जी सिम की जानकारी मिलने पर तुरंत नजदीकी साइबर थाने में रिपोर्ट करें। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। राजस्थान पुलिस के साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

