उपासरों में गूंजी कल्पसूत्र की महिमा: लाभार्थियों ने गाजे-बाजे से वोहराया ग्रंथ, आचार्यों ने दिए आत्मशुद्धि के संदेश
सिरोही के जैन उपासरों में ‘कल्पसूत्र’ ग्रंथ का वाचन शुरू, आचार्यों ने बताया आत्मशुद्धि और त्याग का महत्व
सिरोही / राजस्थान
सिरोही जिले के सभी प्रमुख जैन उपासरों में आचार्य भगवंतों एवं मुनिराजों की पावन निश्रा में पर्युषण महापर्व के चौथे दिन जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथ 'कल्पसूत्र' का वाचन पूरे विधि-विधान के साथ शुरू हुआ। पूजा-अर्चना एवं अष्ट प्रकारी पूजा के बाद लाभार्थियों ने गाजे-बाजे के साथ कल्पसूत्र ग्रंथ साधु-साध्वी भगवंतों को वोहराया।
आचार्यों ने दी कल्पसूत्र की महिमा पर जानकारी: आबू देलवाड़ा में आचार्य श्री हेमवल्लभसूरीश्वर जी, सिरोही में आचार्य श्री जगच्चंद्रसूरी जी, जीरावला तीर्थ में आचार्य श्री रविशेखरसूरी जी, मीरपुर तीर्थ में युवाचार्य श्री लब्धिवल्लभसूरी जी और पिण्डवाड़ा में आचार्य श्री रत्नसेनसूरी जी ने कल्पसूत्र की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। आचार्यों ने बताया कि इस ग्रंथ में तीर्थंकरों का जीवन परिचय, उनके गुण और साधु-साध्वियों की आचार संहिता का विस्तृत वर्णन है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बरकरार है।
देलवाड़ा में 130 से अधिक आराधक साधना में लीन: देलवाड़ा तीर्थ में देशभर से आए 130 से अधिक श्रद्धालु कठिन आत्मशुद्धि की साधना में जुटे हैं। कल्पसूत्र के रचयिता श्रुतकेवली भद्रबाहु स्वामी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए आचार्यों ने कहा कि राग-द्वेष और मोह के क्षय से ही मोक्ष संभव है।
'जो मांगे उसे भागे, जो त्यागे उसके आगे' तीर्थंकरों के कालखंड का भेद स्पष्ट करते हुए आचार्यश्री ने बताया कि भगवान महावीर के काल में जीवों की प्रकृति के अनुसार नियम कड़े बनाए गए हैं। उन्होंने "जो मांगे उसे भागे, जो त्यागे उसके आगे" का संदेश देते हुए सभी श्रद्धालुओं को उपवास, मौन, प्रतिक्रमण और क्षमा भाव धारण करने की प्रेरणा दी। मीरपुर और सिरोही सहित पूरे जिले में पर्युषण को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

