मातृशक्ति की सुरक्षा सर्वोपरि: उत्तर प्रदेश में जीपीएस व सीसीटीवी कैमरों से लैस चलेंगी 'पिंक कैब्स', महिला चालकों को मिलेगा रोजगार
मातृशक्ति की सुरक्षा को लेकर यूपी सरकार का बड़ा कदम: SOS पैनिक बटन और लाइव मॉनिटरिंग से लैस होगी नई कैब सेवा
लखनऊ (कमलेश जैन)
प्रदेश में महिलाओं, युवतियों और कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा व सुगम आवाजाही को सर्वोपरि रखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी पहल की शुरुआत की है। राज्य में 24 घंटे सातों दिन (24x7) लाइव मॉनिटरिंग, जीपीएस और अत्याधुनिक एसओएस (SOS) पैनिक बटन से लैस विशेष महिला कैब सेवा जल्द ही शुरू की जा रही है।
क्यों पड़ी इस विशेष कैब सेवा की जरूरत?
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों—जैसे लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, वाराणसी, मेरठ और आगरा—में कॉर्पोरेट, आईटी, हॉस्पिटैलिटी और अन्य क्षेत्रों में देर रात तक काम करने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। रात की शिफ्ट में घर से दफ्तर आने-जाने के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने और निजी कैब सेवाओं में होने वाली अप्रिय घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन ने मिलकर यह आधुनिक परिवहन ढांचा तैयार किया है।
हाई-टेक सुरक्षा फीचर्स से लैस होंगी कैब्स
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जीपीएस और पैनिक बटन: हर कैब को राज्य पुलिस के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग द्वारा जोड़ा जाएगा। गाड़ी में हर सीट के पास इमरजेंसी 'एसओएस पैनिक बटन' लगा होगा, जिसे दबाते ही पुलिस कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।
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सीसीटीवी व नाइट विजन: गाड़ियों के अंदर लाइव सीसीटीवी कैमरे और नाइट विजन रिकॉर्डिंग की सुविधा रहेगी।
महिला चालकों को रोजगार और सशक्तिकरण
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए इस योजना में प्रशिक्षित महिला चालकों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार महिलाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण देने के साथ-साथ रियायती दरों पर इलेक्ट्रिक/कमर्शियल वाहन उपलब्ध कराने की योजना पर कार्य कर रही है। महिला ड्राइवर होने से सफर करने वाली छात्राएं और महिलाएं अधिक सहज और सुरक्षित महसूस करेंगी।
प्रथम चरण में लखनऊ और एनसीआर से शुरुआत
योजना के प्रथम चरण में इसकी शुरुआत राजधानी लखनऊ और एनसीआर (नोएडा-गाजियाबाद) से होगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से कानपुर, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे महानगरों में इसका विस्तार किया जाएगा। मेट्रो स्टेशनों, आईटी पार्क्स, विश्वविद्यालयों और रेलवे स्टेशनों के पास विशेष पिक-अप व ड्रॉप पॉइंट्स बनाए जाएंगे।

