जोधपुर में बैंक मैनेजर की सूझबूझ से बची बुजुर्ग की गाढ़ी कमाई: 'डिजिटल अरेस्ट' के झांसे में आकर एफडी तुड़वाकर 31 लाख ट्रांसफर करने जा रहे थे पीड़ित
जोधपुर / राजस्थान
राजधानी जयपुर के बाद अब जोधपुर में भी साइबर ठगों द्वारा 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर बुजुर्गों को डराने और ठगी करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। हालांकि, यस बैंक की एक महिला बैंक मैनेजर की सतर्कता और जोधपुर साइबर पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते एक बुजुर्ग व्यक्ति के 31 लाख रुपए डूबने से ऐन वक्त पर बच गए। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग और गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर बुजुर्ग को इस कदर डरा दिया था कि वे अपनी एफडी तुड़वाकर रकम ट्रांसफर करने बैंक पहुंच गए थे।
वाट्सएप वीडियो कॉल पर रची गई ठगी की साजिश
साइबर थाना पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला 14 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ था। अज्ञात साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग को वाट्सएप पर वीडियो कॉल किया और खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। ठगों ने डराया कि उनके बैंक खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध लेन-देन हुआ है। गिरफ्तारी का भय दिखाकर ठगों ने उन्हें वेरिफिकेशन के नाम पर अपनी सारी रकम बताए गए सरकारी खातों में जमा कराने को कहा, जिससे वे अपनी जमा-पूंजी गंवाने की कगार पर पहुंच गए थे।
बैंक मैनेजर की पैनी नजर और स्पेलिंग मिस्टेक से खुला राज
घटनाक्रम के मुताबिक, जब बुजुर्ग PWD सर्किल के पास स्थित यस बैंक पहुंचे और आरटीजीएस (RTGS) के जरिए बड़ी रकम ट्रांसफर करने लगे, तो डिप्टी मैनेजर मनीषा पंवार को उनकी गतिविधियां संदेहास्पद लगीं। मैनेजर ने जब आरटीजीएस फॉर्म पर फर्म का नाम देखा, तो उसमें अंग्रेजी स्पेलिंग में गलती थी। जब मैनेजर ने पूछताछ की, तो बुजुर्ग ने पहले टालमटोल की और पुणे में सामान खरीदने की बात कही।
लेकिन, मैनेजर मनीषा पंवार उन्हें पहले से जानती थीं और उनके हाव-भाव भांप गईं। उन्होंने तुरंत बुजुर्ग का फोन स्विच ऑफ करवाया (क्योंकि ठगों ने उनका फोन हैक कर रखा था) और उन्हें भरोसे में लेकर तसल्ली से पूरी बात पूछी। बुजुर्ग ने जब डिजिटल अरेस्ट और मनी लॉन्ड्रिंग के डर की पूरी कहानी बताई, तो मैनेजर को समझते देर नहीं लगी कि वे साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति
बैंक मैनेजर ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत साइबर पुलिस थाना जोधपुर को सूचना दी। सूचना मिलते ही एसआई राजेश कुमार और कांस्टेबल धीरेन्द्र सिंह बैंक पहुंचे। पुलिस टीम ने बुजुर्ग की काउंसलिंग की और उन्हें साइबर अपराध के नए तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया। पुलिस और बैंक की इस सूझबूझ के चलते बुजुर्ग की तीन अलग-अलग बैंकों की एफडी से निकाले गए 31 लाख रुपए सुरक्षित बच गए।
जोधपुर पुलिस की आमजन से अपील
पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर चेतावनी जारी करते हुए आमजन से अपील की है कि पुलिस, सीबीआई, ईडी या कोई भी अन्य केंद्रीय/राज्य जांच एजेंसी कभी भी वाट्सएप या वीडियो कॉल पर किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती है। यदि कोई व्यक्ति आधार कार्ड, सिम या बैंक खातों के दुरुपयोग का डर दिखाए, तो घबराएं नहीं और तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।

