कफ सीरप से बिगड़ी मासूम की तबीयत:परिजनों की शिकायत पर डॉक्टर ने पीकर किया ट्राई, दोनों जयपुर के अस्पताल में भर्ती
दवा की गुणवत्ता पर सवाल" वितरण पर रोक लगाई
भरतपुर (राजस्थान) मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत मिली कफ सीरप पीने के बाद 3 साल के बच्चे की तबीयत बिगड़ने के मामला सामने आया है। जब डॉक्टर ने इसे खुद इसे पीकर देखा तो उनकी भी तबीयत बिगड़ गई। मामला भरतपुर जिले की कलसाड़ा सीएचसी का है।
मामले को लेकर बयाना ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. धर्मेंद्र चौधरी ने बताया-डेक्सट्रोमेथोरफेन हाइड्रो ब्रोमाइड सॉल्ट वाली सिरप के एक बैच से समस्या की आशंका है। एहतियातन इस बैच की आपूर्ति और वितरण पर जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में रोक लगा दी गई है।
ब्लॉक सीएमएचओ ने बताया- बयाना के कलसाड़ा निवासी गगन (3) को 25 सितंबर को परिजन तबीयत खराब होने पर अस्पताल में दिखाने के लिए लाए थे। परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ताराचंद योगी की ओर से दवाईयां दी गईं थीं। इसमें से डेक्सट्रोमेथोरफेन हाइड्रोब्रोमाइड सॉल्ट वाली कफ सीरप पीने के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। बच्चे को बेहोशी और हार्टबीट तेज होने की शिकायत हुई। परिजनों ने बच्चे को पहले महवा (दौसा) और फिर जयपुर के जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया, जहां बच्चे को वेंटिलेटर पर लेने तक की नौबत आ गई। 48 घंटे बाद जाकर बच्चा होश में आया। फिलहाल बच्चा जेके लोन अस्पताल में भर्ती है।

- परिजनों की शिकायत पर डॉक्टर और स्टाफ ने पी दवाई
परिजनों की शिकायत के बाद 26 सितंबर को सीएचसी प्रभारी डॉ. ताराचंद योगी ने शुक्रवार सुबह सिरप पीकर देखी तो उनकी तबीयत भी खराब हो गई। इसी तरह 108 एंबुलेंस ड्राइवर राजेंद्र शुक्ला और 104 एंबुलेंस ड्राइवर बदन सिंह ने भी सीरप ट्राई की, जिससे तीनों को चक्कर और बेहोशी की स्थिति बनी।
- डॉक्टर जयपुर के निजी अस्पताल में भर्ती
डॉ.योगी की हालत इतनी बिगड़ी कि भरतपुर जाते समय रास्ते में सिकंदरा के गणेश मोड़ पर कार साइड में लगाकर लेट गए और करीब 8 घंटे तक बेहोश पड़े रहे। बाद में ब्लॉक सीएमएचओ और स्टाफ ने पुलिस की मदद से लोकेशन ट्रेस कर उन्हें कार से निकाला और अस्पताल पहुंचाया। बयाना उपजिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पहले भरतपुर जिला अस्पताल और फिर जयपुर रेफर किया गया। डॉ. योगी फिलहाल जयपुर के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती हैं।
वहीं घटना के बाद चिकित्सा विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। एहतियातन इस बैच की आपूर्ति और वितरण पर जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में रोक लगा दी गई है।