किसान नीलगाय से हैं परेशान, अपनाएं आसान उपाय
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
उपखंड क्षेत्र में आवारा जानवरों और नीलगाय का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. जंगलों के किनारे बसे गांवों में किसानों की फसलें नीलगाय बर्बाद कर देती है. रात होते ही नीलगाय और आवारा पशु खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, जिसके कारण किसानों को लाखों रुपये का घाटा झेलना पड़ रहा है. कई परिवारों की पूरी-की-पूरी फसल बर्बाद हो जाती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
ऐसे हालात में किसानों ने अपने स्तर पर नए-नए प्रयास शुरू किए हैं। कुछ किसानों ने खेतों की मेड़ों के चारों ओर लहसुन और धनिया की बुवाई शुरू कर दी है। तेज़ गंध निकलने वाली इन फसलों के कारण नीलगाय खेतों में घुस नहीं पाती है। किसानों का कहना है कि जहां लहसुन और धनिया की तीखी सुवास रहती है, वहां नीलगाय पास तक नहीं आती, जिससे मुख्य फसलें सुरक्षित रहती हैं। इस तरीके से किसानों को न केवल अपनी फसल बचाने में मदद मिल रही है, बल्कि इन अतिरिक्त फसलों की बिक्री से अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।
इसी विषय पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप बिसेन ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसान लहसुन और धनिया को खेतों की सीमा पर लगाकर दोहरा लाभ कमा रहे हैं। यह तरीका प्राकृतिक होने के साथ-साथ किफायती भी है। उन्होंने बताया कि यदि किसी क्षेत्र में नीलगाय और आवारा पशुओं की समस्या निरंतर बनी रहती है, तो किसान इसके लिए तेज़ गंध वाले रासायनिक पदार्थों का भी उपयोग कर सकते हैं, जो नीलगाय को खेतों में आने से रोकने में मदद करते हैं।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. बिसेन ने कहा कि खेतों के चारों ओर फिनायल का छिड़काव करने से नीलगाय खेतों में प्रवेश नहीं कर पाती, क्योंकि इसकी तेज़ गंध उन्हें परेशान करती है। हालांकि इसका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक और सीमित मात्रा में करना चाहिए।
फिनायल को पानी में घोलकर छिड़कें. 50 मिलीलीटर फिनायल प्रति 1 लीटर पानी की मात्रा में घोल तैयार करें। इस घोल को खेतों की मेड़, रास्तों और उन स्थानों पर छिड़कें जहाँ नीलगाय अक्सर आती हैं।जूट के बोरे या मोटे कपड़े को फिनायल मिश्रण में भिगोकर बांस की बल्लियों पर बांधकर खेतों के चारों ओर लगाया जा सकता है. तेज गंध लंबे समय तक बनी रहती है और नीलगाय नजदीक नहीं आती है।
गोबर का घोल- इसके अलावा किसानों को सुझाव दिया गया है कि गोबर का घोल बनाकर मेड़ से करीब एक मीटर अंदर फसलों पर हल्का-फुल्का छिड़काव किया जाए। इसकी गंध भी कुछ समय के लिए नीलगाय और आवारा पशुओं को दूर रखती है और फसलें सुरक्षित रहती हैं।