साइबर अपराधियों के विरुद्ध डीग पुलिस का महा-अभियान; ऑपरेशन म्यूल हंटर” के तहत 103 आरोपी गिरफ्तार, 34 प्रकरण दर्ज
डीग (नीरज जैन) डीग पुलिस ने साइबर अपराध पर प्रभावी कार्रवाई करते हुए “ऑपरेशन म्यूल हंटर” के तहत व्यापक अभियान चलाया, जिसमें साइबर ठगी में लिप्त अपराधियों और कमीशन के आधार पर बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए। इस अभियान के दौरान कुल 103 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा विभिन्न धाराओं में 34 प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
एसपी शरणं गोपीनाथ ने बताया है कि जांच के दौरान यह सामने आया कि इन साइबर ठगों के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर कुल 156 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें लगभग 4.80 करोड़ रुपये की ठगी के मामले शामिल हैं। यह आंकड़े साइबर अपराध के बढ़ते दायरे और संगठित नेटवर्क की गंभीरता को दर्शाते हैं।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की है, जिसमें 108 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 158 फर्जी सिम कार्ड, 20 एटीएम कार्ड, 18 बैंक पासबुक, 9 चेकबुक, एक थार गाड़ी तथा 2 लाख 32 हजार रुपये नकद शामिल हैं। इसके साथ ही साइबर नेटवर्क को कमजोर करने के उद्देश्य से 1074 सिम कार्ड और 1056 आईएमईआई नंबर ब्लॉक कराए गए हैं।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सहयोग” के तहत डीग पुलिस ने अन्य राज्यों से आई पुलिस टीमों को सहयोग प्रदान करते हुए पांच वांछित अपराधियों को पकड़कर संबंधित राज्यों को सुपुर्द किया। साथ ही अभियान के दौरान उन व्यक्तियों को भी चिन्हित किया गया, जो कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराते हैं, और उनके विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जा रही है।
जांच में साइबर ठगों के कार्य करने के विभिन्न तरीके सामने आए हैं। इनमें व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से परिचित बनकर पैसे मांगना, सेक्टॉर्शन के जरिए ब्लैकमेल करना, फर्जी नौकरी के नाम पर एडवांस राशि लेना, पुराने सिक्के या नोट खरीदने का झांसा देना तथा सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन डालकर टैक्स या फाइल चार्ज के नाम पर पैसे वसूलना शामिल है। ठग ठगी की राशि को तुरंत विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर अपनी पहचान छिपाने का प्रयास करते हैं।
एस पी के अनुसार साइबर अपराध की रोकथाम के लिए डीग पुलिस द्वारा जन-जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थानों और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक स्वयं साइबर अपराध से प्रभावित क्षेत्रों में जाकर युवाओं से संवाद कर उन्हें इसके कानूनी और सामाजिक दुष्परिणामों से अवगत करा रहे हैं।
अभियान के दौरान आम नागरिकों के नाम पर सिम जारी कर साइबर ठगों को उपलब्ध कराने वाले दो पीओएस सिम विक्रेता एजेंटों के विरुद्ध भी प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
एस पी शरण गोपीनाथ ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई गई है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। आमजन से अपील की गई है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या सिम किसी अनजान व्यक्ति को न दें, क्योंकि दुरुपयोग की स्थिति में संबंधित व्यक्ति भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में देने के लिए कहा गया है।
उन्होंने सख्त संदेश देते हुए कहा है कि साइबर अपराधियों के लिए डीग जिले में कोई स्थान नहीं है,या तो वे अपराध छोड़ दें या जिला छोड़ दें।


