लोहड़ी पर्व 13 को, नवजोड़ों व नवजात की खुशी में घर-घर होगा उत्सव
खैरथल (हीरालाल भूरानी ) पंजाबी समाज की ओर से लोहड़ी पर्व 13 जनवरी को पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। जिन घरों में हाल ही में विवाह हुआ है अथवा नवजात शिशु का जन्म हुआ है, वहां विशेष रूप से लोहड़ी पर्व मनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी है।
घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जाएंगे और उत्सव का माहौल रहेगा। पंजाबी समाज खैरथल द्वारा सामूहिक लोहड़ी कार्यक्रम का आयोजन 13 जनवरी को माया कॉलोनी स्थित पंजाबी भवन में शाम 7:15 बजे किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय विकास परिषद के सदस्य एवं पूर्व विधायक रामहेत सिंह यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
पंजाबी समाज खैरथल के अध्यक्ष भारत भूषण गुलयानी ने बताया कि सामूहिक आयोजन में पंजाबी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। लोहड़ी जलाई जाएगी, ढोल की थाप पर पारंपरिक नृत्य होंगे और लोकगीतों से वातावरण उल्लासमय बनेगा। कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में है।
पंजाबी समाज के उद्योगपति सोनू एवं गोविन्द राम सोनी ने बताया कि लोहड़ी एक प्राचीन पर्व है, जो सर्दियों के अंत और बसंत के आगमन का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व मनाया जाता है और सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ इसका विशेष धार्मिक महत्व जुड़ा है। पहले यह पर्व मुख्य रूप से पंजाबी समाज तक सीमित था, लेकिन अब पूरे उत्तर भारत में इसे उत्साहपूर्वक मनाया जाने लगा है।
लोहड़ी पर्व के दौरान लोग आग के चारों ओर एकत्र होकर पारंपरिक नाच-गान करते हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इसमें भाग लेते हैं। घरों में बनाए गए विशेष व्यंजन जैसे गजक, तिल-गुड़ की मिठाइयां, रेवड़ी और मूंगफली एक-दूसरे को बांटी जाती है। यह पर्व सामाजिक समरसता, प्रेम और आपसी सद्भाव का प्रतीक है।
लोहड़ी का सीधा संबंध फसल की कटाई से भी जुड़ा है। यह पर्व किसानों के लिए नई आशा और समृद्धि का संदेश देता है।
तिल व मूंगफली एंटीऑक्सीडेंट्स के प्रमुख स्रोत
जिला खैरथल - तिजारा के सी एम एच ओ डॉ. अरविन्द गेटवाल ने बताया कि लोहड़ी पर रेवड़ी, तिल, गुड़ और मूंगफली का वितरण किया जाता है, जो सर्दी के मौसम में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इन्होंने यह भी बताया कि ये सभी खाद्य पदार्थ गर्म तासीर के होते हैं। इनमें कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, फाइबर, विटामिन-ई और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इससे हड्डियां मजबूत होती है, खून की कमी दूर होती है,पाचन बेहतर रहता है तथा त्वचा, बाल और हृदय के लिए लाभकारी होते हैं। अजमेर के पूर्व डिप्टी सी एम एच ओ डॉ लाल थदानी ने बताया की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी ये सहायक है। उन्होंने बताया कि पर्व के दौरान आग जलाना बुराई के अंत और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर बच्चे और युवा पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत गाकर संस्कृति की जीवंत प्रस्तुति देते हैं।