गोविंदगढ़ : कागजों में 'उत्थान', धरातल पर सन्नाटा: प्रचार के अभाव में फ्लॉप हुआ GRAM-2026 पूर्व तैयारी शिविर
गोविंदगढ़ (अलवर) सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने के दावे उस समय खोखले नजर आए, जब रविवार को गोविंदगढ़ उपखंड के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, रामबास में आयोजित 'ग्राम उत्थान शिविर' पूरी तरह बेरंग नजर आया। 'ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट' (GRAM-2026) के उपलक्ष्य में आयोजित इस शिविर में पांच ग्राम पंचायतों के किसानों को जुटना था, लेकिन सूचना के अभाव में पंडाल की कुर्सियां दिनभर खाली रहीं।
प्रचार के बिना कैसे पहुंचे जनता?
यह शिविर ILR हल्का रामबास, भैंसडावत, सैमलाखुर्द, खरसनकी और तालड़ा के किसानों व पशुपालकों के लिए था। नियमानुसार, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और डेयरी जैसे दर्जन भर विभागों की योजनाओं का लाभ यहाँ दिया जाना था।
विडंबना यह रही कि इतने बड़े आयोजन का क्षेत्र में कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। नतीजा यह रहा कि ग्रामीण तो दूर, संबंधित गांवों के जागरूक लोगों तक को इसकी भनक नहीं लगी।
समाजसेवी ने उठाए सवाल, कहा- 'सरकार को दिया जा रहा धोखा'
मौके पर मौजूद समाजसेवी शक्तिधर भारद्वाज ने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा, "यह पहली बार देखा गया है कि इतने बड़े स्तर का सरकारी कैंप बिना किसी मुनादी या सूचना के आयोजित कर दिया गया।
जब ग्रामीणों को पता ही नहीं है कि कैंप लगा है, तो वे लाभ कैसे उठाएंगे? यह जनता और सरकार दोनों के साथ धोखा है। अधिकारियों को केवल कोरम पूरा करने की पड़ी है, सरकार की मंशा की किसी को फिक्र नहीं है।"
अधिकारियों के संवाद बिना कैसे बढ़ेगी आय?
GRAM-2026 का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। लेकिन जब धरातल पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का ग्रामीणों से संवाद ही नहीं होगा, तो ये योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित रह जाएंगी। स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे शिविरों का दोबारा आयोजन पारदर्शी तरीके से और पर्याप्त प्रचार के बाद किया जाए ताकि सरकारी धन और समय का सदुपयोग हो सके।