जीवन रूपी नाव को नहीं, हमारे भाव को पलट देना- संत पं.प्रभुजी नागर
अंता (शफीक मंसूरी ) मालवा के गौ सेवक संत पं.प्रभु जी नागर ने धतुरिया में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे सोपान में कहा कि भक्त भगवान से यही प्रार्थना करना कि हे नाथ, जीवन रूपी नाव को मत पलटाना, तू बस हमारे भाव को पलटा देना। हम अच्छे कर्म करते हुये भक्ति की धारा से जुड़ें रहें।
श्रद्धालुओं से सराबोर विराट पांडाल में उन्होंने कहा कि हमारी कंचन काया की तिजोरी भगवान के नाम से ही भरती है। मीरा बाई राम रतन धन पायो.. के निरंतर जप से ही सब कुछ भूल गई थी। कोई चोर या यमदूत भी भक्ति बल के धन को नहीं छुड़ा पाया। जीवन के अंत में पंच तत्वों का शरीर ही बचता है। सारे रिश्ते खत्म हो जाते हैं। इसलिये निरंतर जप करने के लिये भागवत भक्ति से अवश्य जुडें़।
संत प्रभूजी नागर ने कहा कि परिवार के मुखिया को सट्टा की जीत और बेटा की जिद कभी पूरी नहीं करना चाहिये। जीवन में धर्म और संस्कृति की राह पर चलते हुये सदकार्य करते रहें। बच्चों में अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी आवश्यक हैं। किशोर उम्र में उनकी संगत अच्छी होगी तो वे मदिरा की जगह मंदिर की ओर कदम बढ़ायेंगे। भक्ति का उद्भव आपकी संगत से ही होता है।
भक्त के लिये नियम बदलता है भगवान
जीवन के अंत में भगवान का नाम और भगवान का भरोसा ही बचना चाहिये। यही मोक्ष है। भगवान पर कभी संशय मत रखना। गुरू और गोविंद दोनों में जिसने आपको जीते-जी निभाया है, वह अंत समय में भी निभायेगा। भक्त के काम के लिये भगवान अपने नियम बदल देता है। हमारे ऋषि-मुनि मानते हैं कि भक्तों के प्रबल प्रेम के पाले पड़कर प्रभू को भी नियम बदलते देखा है।एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुये पं.नागरजी ने कहा कि जिस तरह भोज में छोटी-मोटी नुक्ती एक दूसरे से मिलकर हजारों लोगों का भंडारा पूरा कर देती है। क्योंकि उसे सब तक पहुंचने के लिये ही बनाया गया था। फिर जो नुक्की बच गई उसे घर-घर बांट दो। यही ईमानदारी है। गांव में जब भी कोई अच्छा काम करने के लिये कोई समिति बनाई जाये उसमें ईमानदारी से जुडे़ं। झगड़ा करोगे तो आगे कोई साथ नहीं देगा। सबको नुक्ती की तरह मधुरता से जोड़े रखें। अंत में विधायक प्रमोद जैन भाया, जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया एवं आयोजक पटेल हरिश्चंद्र नागर परिवार सहित हजारों श्रोताओं ने भागवत आरती की।

