आर्य समाज कोई संप्रदाय नही,बल्कि एक विचारधारा - लेझीम नृत्य ने मन मोहा
भुसावर (विष्णु मित्तल) आर्ष कन्या गुरूकुल परिवार की ओर से कस्वा भुसावर में संचालित आर्ष कन्या गुरूकुल पर संस्थापक हरिश्चन्द्र शास्त्री एवं प्राचार्या डॉ.प्रियका आर्या के सानिध्यं में आर्य समाज उत्तरप्रदेश की प्रमुख कार्यकर्ता स्वर्गीय श्रीमती संध्या मित्त्ल की स्मृति में चल रहे सामवेद परायण यज्ञ एवं राष्ट्रीय स्तरीय आर्य समाज सभा के तहत रविवार को स्वामी शिवयोगी रूद्रनाथ विशाल ने कहा कि आर्य समाज कोई संप्रदाय नही है,एक विचारधारा है। ये समाज वेदों की ओर लौटो का नारा देता है। आर्य समाज के अनुसार सच्चा धर्म वही है,जो मानवता की भलाई करे और सबको साथ लेकर चले,जिसमें कोई अन्धविश्वास ना हो और जो वेदों के मूल मन्त्र पर चले। आर्य कन्या गुरूकुल के संस्थापक हरिश्चन्द्र शास्त्री ने कहा कि आर्य समाज हमेशा मानव सेवा का ज्ञान, आत्निर्भता, महिला सशक्तिकरण, आत्म सुरक्षा, गौवंश व प्रकृति की रक्षा,पर्यावरण की शुद्वता, शिक्षा, वेदों का प्रचार-प्रसार आदि पर ध्यान देता है और समाज में व्याप्त अन्धविश्वास,पाखण्ड,बहारी पूजा पाठ,निरक्षता,अहिंसा आदि का विरोध करता है।
हमे वेदों का ज्ञान प्राप्त कर देश,समाज और परिवार के हित में कार्य करना चाहिए। इस अवसर पर मुख्य यज्ञमान वरिष्ठ आईएएस केशरलाल मीणा,अरूण मित्तल, राजेश गोयल, विपिन बंसल, ज्ञानचन्द, सुभाष आर्य, एन.के.पाण्डेय, सौरभ आर्य, श्रीमती सुमित्रा आर्या, मनोरमा त्यागी, विष्णु मित्तल, सत्यवीर आर्य, महाराज सिंह, प्रकाशचन्द शर्मा, ओमप्रकाश पंसारी, कमलाकान्त शर्मा, चेतराम मीणा आदि ने वेदों के ज्ञान पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम संयोजिका एवं कन्या गुरूकुल की प्राचार्या डॉ.प्रियका आर्या ने बताया कि कस्वा भुसावर के आर्ष कन्या गुरूकुल पर 20 से 22 मार्च तक समावेद परायण यज्ञ एवं आर्य समाज सभा का आयोजन हुआ,जिसमें देशभर से आर्य समाज के वक्ता एवं विचारकों सहित स्थानीय लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में गुरूकुल की बालिकाओं ने लेझीम, पीटी, योग, संगीत, तलवार बाजी आदि का प्रदर्शन किया,जिसने सभी लोगों का मन मोह लिया। साथ ही समावेद पारायण यज्ञ की आहुतियां देकर विश्वशान्ति,देश व समाज का उत्थान, परिवार व मानव जीवन का उत्थान आदि संकल्प लिया।