भोपाल क्लब की संपति पर कब्जे की कार्रवाई पर राजस्थान हाईकोर्ट की रोक; जोधपुर बेंच ने कलेक्टर और नगर निगम के आदेश किए निलंबित
जोधपुर (बृजेश शर्मा) राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने भोपाळ क्लब, भीलवाड़ा की संपत्ति पर जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा किए गए कब्जे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रस्तुत मामला विचारणीय है, इसलिए प्रशासनिक आदेशों की प्रभावीता अगली सुनवाई तक निलंबित रहेगी।
याचिका भोपाळ क्लब की ओर से दायर की गई थी, जो सोसायटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1958 के तहत पंजीकृत संस्था है। क्लब की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य और अधिवक्ता रोहिन भंसाली ने अदालत को बताया कि 6 मार्च 2026 को अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) एवं भोपाळ क्लब के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने एक आदेश जारी किया। इसी आदेश के आधार पर नगर निगम आयुक्त ने 9 मार्च 2026 को क्लब की निजी संपत्ति पर कब्जा कर लिया और इसे महात्मा गांधी अस्पताल के लिए पार्किंग क्षेत्र विकसित करने के उद्देश्य से अधिग्रहीत बताया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि भोपाळ क्लब एक पंजीकृत निजी संस्था है और प्रशासन ने बिना किसी वैधानिक अधिकार और प्रक्रिया के उसकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया। न तो सोसायटी को भंग किया गया, न ही इसकी आम सभा में किसी प्रस्ताव को पारित किया गया। इस प्रकार प्रशासन की कार्रवाई पूर्णतया अवैध और अधिकारहीन है।
अदालत ने तर्कों को सुनने के बाद माना कि मामला गंभीर कानूनी प्रश्न उत्पन्न करता है। इसलिए अदालत ने नोटिस जारी कर जिला कलेक्टर, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रशासन), नगर निगम आयुक्त, सोसायटी रजिस्ट्रार, उप पंजीयक सोसायटीज़, तहसीलदार सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि 6 मार्च 2026 के अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) द्वारा पारित आदेश तथा 9 मार्च 2026 को आयुक्त नगर निगम द्वारा लिया गया कब्जा—दोनों की प्रभावी रूप से अगले आदेश तक स्थगित रहेगी। साथ ही भोपाळ क्लब की संपत्ति का उपयोग महात्मा गांधी अस्पताल की पार्किंग के रूप में नहीं किया जाएगा और न ही इस संबंध में कोई आगे की कार्रवाई होगी।
इस आदेश के बाद भोपाळ क्लब को तत्काल राहत मिली है। शहर के प्रमुख सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस क्लब की संपत्ति पर कब्जे की कार्रवाई के बाद से मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था। अब अदालत की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन की कार्रवाई किन कानूनी आधारों पर की गई और आगे इस विवाद का क्या समाधान निकलता है।