फर्जी पुलिस गैंग का खुलासा: ठगों को ले जा रहे तीन फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार, तीन हथियार लहराते हुए भागे
डीग (राजस्थान) कामां क्षेत्र में फर्जी पुलिस बनकर सक्रिय एक संगठित गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गैंग के सदस्य खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों में दहशत फैलाते थे और साइबर ठगी से जुड़े लोगों को निशाना बनाकर उनका अपहरण कर अवैध वसूली करते थे। पुलिस ने 5 किलोमीटर तक पीछा कर छह में से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि तीन आरोपी हथियार लहराते हुए फरार हो गए।
कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से दो अवैध हथियार, कारतूस, पुलिस वर्दी, बत्ती-सायरन और पुलिस का लोगो लगी गाड़ी बरामद की गई है। सूचना मिलते ही जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) सक्रिय हुई। विरार रोड से आरोपियों का पीछा किया गया और लेहसर इलाके में घेराबंदी की गई। इस दौरान बदमाशों ने पुलिस की गाड़ी को टक्कर मारने और फायरिंग की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोच लिया। कार्रवाई में प्रभारी वीरेंद्र सिंह, प्रेमचंद शर्मा, शशि कपिल, चालक लक्ष्मण सिंह और मुस्तकीम की अहम भूमिका रही।
- डीएसटी की सतर्कता से खुला खेल, लंबे समय से सक्रिय गिरोह
जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) की सतर्कता से कामां क्षेत्र में सक्रिय फर्जी पुलिस गैंग का खुलासा हो सका। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी काफी समय से इलाके में फर्जी पुलिसकर्मी बनकर सक्रिय थे और सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम दे रहे थे। गैंग के सदस्य पहले साइबर ठगी से जुड़े लोगों को चिन्हित करते थे। पुलिस बताकर उनके गांवों में दबिश देते थे। आरोपी गिरफ्तारी का डर दिखाकर पीड़ितों को उठाकर ले जाते और फिर उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
अपहृत दो युवक सुरक्षित छुड़ाए: पुलिस ने झेझपुरी निवासी दो अपहृत व्यक्तियों को गैंग के चंगुल से सुरक्षित मुक्त कराया। दोनों को पुलिस सुरक्षा में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गैंग साइबर ठगी से जुड़े लोगों को टारगेट कर उनका अपहरण करता था और फिर उनसे मोटी रकम वसूलता था।
पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर उस स्थानीय व्यक्ति की पहचान में जुटी है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पूरे गैंग की कड़ियां जोड़ने का प्रयास जारी है।
- साइबर ठगों को चिन्हित कर गांव में देते थे दबिश
जांच में सामने आया है कि गैंग का नेटवर्क हरियाणा से जुड़ा हो सकता है, वहीं बरामद वर्दी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। आरोपियों के पास से जो पुलिस वर्दी मिली है, उस पर “दिल्ली पुलिस” लिखा हुआ है और दिल्ली पुलिस का लोगो भी लगा हुआ है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि गैंग सुनियोजित तरीके से अलग-अलग राज्यों की पुलिस की पहचान का दुरुपयोग कर रहा था।
पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि इंटरस्टेट नेटवर्क के रूप में सक्रिय हो सकता है। आरोपी फर्जी पहचान के जरिए लोगों में भरोसा और डर दोनों पैदा करते थे, जिससे वे आसानी से अपने शिकार को फंसा लेते थे।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क, उसके संपर्कों और अन्य सदस्यों की पहचान में जुटी है। वर्दी और अन्य बरामद सामान के आधार पर यह भी जांच की जा रही है कि इन फर्जी पुलिसकर्मियों का कनेक्शन किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है।


