शादियों पर 'गैस संकट' का साया: पहला कार्ड गणेश जी को, तो दूसरा DSO को; तभी मिलेंगे 3 कॉमर्शियल सिलेंडर
भरतपुर (राजस्थान) शादियों के सीजन में इन दिनों अजीबोगरीब नजारा देखने को मिल रहा है। आमतौर पर लोग शादी का पहला निमंत्रण भगवान गणेश को देते हैं, लेकिन इस बार दूसरा कार्ड नाते-रिश्तेदारों के बजाय सीधे जिला रसद कार्यालय (डीएसओ) पहुंच रहा है।
वजह कोई सियासी रसूख नहीं, बल्कि रसोई का ईंधन यानी गैस सिलेंडर जुटाने की जद्दोजहद है। ईरान-इजराइल के बीच जारी तनाव का असर अब मेवाड़ के वैवाहिक आयोजनों पर साफ दिखाई देने लगा है। एलपीजी के संभावित संकट को देखते हुए प्रशासन ने सिलेंडर वितरण पर सख्ती कर दी है।
अब शादी वाले घरों को गैस के लिए बाकायदा रसद विभाग में आवेदन करना पड़ रहा है। कॉमर्शियल सिलेंडर के लिए आवेदक को 2400 रुपए प्रति सिलेंडर सिक्योरिटी और 2150 रुपए गैस के अलग से जमा कराने होते हैं। साथ ही, नियमानुसार सिलेंडर दो दिन में वापस करना अनिवार्य है। अब तक करीब 370-400 लोगों को सिलेंडर की स्वीकृति दी जा चुकी है।
- जिले में 24 एजेंसियों पर सिर्फ 475 सिलेंडर
- 2-3 सिलेंडर में दावत का खाना तैयार करना असंभव
हलवाई दिनेश प्रजापति ने बताया कि एक सामान्य शादी में कम से कम 10 से 12 कॉमर्शियल सिलेंडरों की जरूरत होती है। ऐसे में 2-3 सिलेंडरों का कोटा नाकाफी है। इतनी कम गैस में दावत तैयार करना संभव नहीं है। मजबूरन अब लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ेगा या फिर ब्लैक मार्केट में 2500 रुपए तक देकर सिलेंडर खरीदना ही विकल्प है।
- सामूहिक विवाह में 5 हजार लोगों की दावत पर संकट
सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजक विजयभान ने बताया 19 अप्रैल को कुशवाह समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन है, लेकिन सिर्फ 3 सिलेंडर ही मिल रहे हैं। ऐसे में 5 हजार लोगों के लिए भोजन कैसे बनेगा।
पवन अग्रवाल, जिला रसद अधिकारी का कहना है कि- “जिलेभर से करीब 400 आवेदन मिले हैं। अधिकांश को कॉमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराए हैं। जिनको नहीं मिले उन्हें भी एजेंसियों से समन्वय कर दिलवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ऑयल कंपनियों को पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है।”


