बालू रेत पर बसी 'गुलाबी नगरी' में जमीन दोह का खतरा: वर्षा ऋतु में सड़कों पर संभलकर चलें, अंदर से खोखली हो रही धरा
जयपुर (गिर्राज प्रसाद सोलंकी) । बालू रेत के टीलों और धरातल पर बसा जयपुर शहर इन दिनों एक बड़े अदृश्य खतरे के साए में है। मानसून की बारिश के साथ ही संपूर्ण गुलाबी नगरी में जगह-जगह 'जमीन दोह' (सड़कें व धरातल धंसने) की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। सीवर लाइन, भूमिगत विद्युत केबल, इंटरनेट फाइबर और जलदाय विभाग की पाइपलाइनों के लिए खोदी गई जमीन बारिश के पानी के साथ बह रही है, जिससे पूरा शहर अंदर से खोखला होता जा रहा है। सड़कों पर आवागमन करने वाले वाहन चालकों से लेकर पैदल राहगीरों तक, सभी की जान जोखिम में है।
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में टोंक रोड स्थित नगर निगम मुख्यालय के ठीक सामने मुख्य सड़क का लगभग 15 से 20 मीटर का हिस्सा अचानक जमींदोज हो गया। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय कोई बड़ा वाहन या राहगीर उसकी ज़द में नहीं आया, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। आनन-फानन में प्रशासनिक अमले ने गड्ढे को भरकर यातायात सुचारू कराया, लेकिन यह घटना शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।
इसी क्रम में मंगलवार सायंकाल सिरसी बिंदायका स्थित रामेश्वर कॉलोनी में विद्युत पोल के ठीक पास की जमीन धंस गई। धंसाव के कारण हाईटेंशन लाइन का पोल कभी भी गिर सकता है, जिससे इलाके में भारी जनहानि और भवनों के ढहने की आशंका बन गई है।
खौफ के साए में निवासी, प्रशासन की अनदेखी
रामेश्वर कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से धंसाव का दायरा बढ़ता जा रहा है, जिससे आसपास बने मकानों की नींव को भी खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय निवासियों ने बिजली विभाग को लिखित एवं दूरभाष के माध्यम से कई बार सूचित किया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक प्रशासनिक हलचल शुरू नहीं हो सकी है।
सतत निगरानी की सख्त जरूरत
मानसून के इस दौर में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA), नगर निगम और विद्युत निगम को संयुक्त रूप से निगरानी दस्ता तैनात करने की आवश्यकता है। शहर के संवेदनशील इलाकों और भूमिगत लाइनों के मार्गों का त्वरित सर्वे कर मरम्मत का कार्य नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है। फिलहाल, बारिश के इस मौसम में गुलाबी नगरी की सड़कों पर सफर करते समय हर नागरिक को बेहद सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है।

