फार्मर आईडी आधारित उर्वरक वितरण व्यवस्था लागू, अनुदानित उर्वरक प्राप्ति के लिए फार्मर आईडी होगी आवश्यक
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) जिले में किसानों को अनुदानित उर्वरकों की उपलब्धता को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अब फार्मर आईडी आधारित उर्वरक वितरण व्यवस्था लागू की गई है। कृषि आयुक्तालय, जयपुर द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत किसानों को अनुदानित उर्वरक वितरण के लिए नवीन प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिससे वास्तविक किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी।
सहायक निदेशक कृषि चरन सिंह ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार किसानों को अनुदानित उर्वरक प्राप्त करने के लिए फार्मर आईडी अथवा उसके पंजीकरण की रसीद प्रस्तुत करनी होगी। जिन किसानों के पास अभी फार्मर आईडी उपलब्ध नहीं है, उन्हें जमाबंदी अथवा एफआरए पट्टे के आधार पर भी अनुदानित उर्वरक उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त किराएदार, बटाईदार, मृतक किसान के कानूनी वारिस तथा संयुक्त खातेदार किसान भी निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत कर इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा जिले में अधिकाधिक किसानों का फार्मर आईडी पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी पात्र किसान को उर्वरक वितरण के दौरान असुविधा का सामना न करना पड़े। विभागीय अधिकारियों को किसानों के बीच व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाने तथा पात्र कृषकों को समय रहते पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश भी प्रदान किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं गैर-कृषि उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है, ताकि अनुदानित उर्वरक केवल वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंच सके। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों को कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कृषि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जिले के किसानों से अपील की कि वे शीघ्र अपने क्षेत्र के पटवारी अथवा संबंधित विभागीय कार्मिक से संपर्क कर फार्मर आईडी बनवाएं तथा पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण करें। इससे न केवल अनुदानित उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा होगी, बल्कि कृषि विभाग एवं राज्य सरकार की अन्य किसान हितैषी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में भी आसानी होगी। नई व्यवस्था लागू होने से जिले में उर्वरक वितरण प्रणाली अधिक सुव्यवस्थित होगी तथा कृषकों को आवश्यकता के समय पारदर्शी एवं सरल प्रक्रिया के माध्यम से अनुदानित उर्वरक उपलब्ध कराया जा सकेगा।


