समर्थन मूल्य में वृद्धि एवं ऊंचे भाव से सरसों का रकबा बढ़ने के आसार
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन। रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल सरसों के लिए इस बार का मौसम और बाजार दोनों ही बेहद अनुकूल नजर आ रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई बढ़ोतरी और थोक मंडियों में मिल रहे ऐतिहासिक ऊंचे दामों के चलते चालू रबी सीजन में सरसों के बिजाई रकबे में खासी बढ़ोतरी होने के आसार बन रहे हैं। प्रमुख सरसों उत्पादक क्षेत्र अलवर जिले के उपखंड लक्ष्मणगढ़ में किसानों ने बिजाई की तैयारियां तेज कर दी हैं।
एमएसपी में ₹413 का इजाफा, खुले बाजार में ₹10,000 का रिकॉर्ड
केंद्र सरकार ने सीजन 2026-27 के लिए सरसों का समर्थन मूल्य ₹6,200 प्रति क्विंटल से ₹413 बढ़ाकर ₹6,613 प्रति क्विंटल निर्धारित कर दिया है। इसके अलावा, पिछले कई महीनों से मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ऊपर बने हुए हैं। हाल ही में एक-दो मंडियों में सरसों के भाव उछलकर ₹10,000 प्रति क्विंटल के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गए हैं, जिससे किसानों को बेहद लाभप्रद आमदनी हो रही है।
खेतों में नमी और बेहतर मानसून का मिल रहा लाभ
लक्ष्मणगढ़ उपखंड क्षेत्र में इस बार मानसूनी बारिश अपेक्षा से बेहतर हुई है, जिससे खेतों में मिट्टी का नमी स्तर बहुत अच्छा है। कृषि जानकारों का कहना है कि बिजाई के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। शुरुआती चरण में बिजाई की गति थोड़ी धीमी जरूर है, लेकिन अगले कुछ दिनों में इसमें भारी तेजी आने की उम्मीद है।
गेहूं और मक्का का रकबा घटाकर सरसों बढ़ाएंगे किसान
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस बार मुनाफा अधिक होने के कारण किसान गेहूं और मक्का का क्षेत्रफल थोड़ा घटाकर सरसों और चने की बिजाई पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, सरकारी एजेंसियों (नैफेड व हैफेड) के पास सरसों का पुराना स्टॉक लगभग खत्म होने के कगार पर है। यदि अगले मार्केटिंग सीजन में भी यही रुझान रहा, तो सरकारी एजेंसियों को किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

