आजमगढ़ का चर्चित दोहरा हत्याकांड: 19 साल बाद आया बड़ा फैसला, ब्लॉक प्रमुख समेत 9 दोषियों को उम्रकैद
आजमगढ़ (शशि जायसवाल)। जिले के रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुदरी गांव में करीब 19 साल पहले ग्राम प्रधानी चुनाव की रंजिश को लेकर हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर-1) कमलापति की अदालत ने ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह सहित नौ आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 74 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। फैसला सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को मंडलीय कारागार इटौरा भेज दिया गया।
दशहरे के दिन गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा था गांव
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह खूनी वारदात 21 अक्टूबर 2007 को दशहरे के दिन सुबह करीब नौ बजे घटित हुई थी। चुनावी रंजिश को लेकर तत्कालीन ग्राम प्रधान विपिन सिंह अपने सहयोगियों के साथ अधिवक्ता रामजन्म सिंह के दरवाजे पर पहुंचे थे। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि अंधाधुंध गोलीबारी शुरू हो गई, जिसमें तालुकदार सिंह और पारसनाथ सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना में परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बेरहमी से मारपीट भी की गई थी।
17 गवाहों की गवाही और 19 साल का लंबा इंतजार
अदालत में करीब दो दशक तक चले इस मुकदमे के दौरान कुल 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सुनवाई के दौरान एक आरोपी राधेश्याम की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि अन्य आरोपी लोकनाथ ने पूर्व में ही अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। 26 अक्टूबर को कोर्ट ने सभी नौ आरोपियों को दोषी ठहराया था, जिसके बाद 29 अक्टूबर को सजा का ऐलान किया गया।
क्रॉस केस में भी 6 लोगों को 5-5 साल की जेल
उल्लेखनीय है कि इसी खूनी संघर्ष से जुड़े दूसरे पक्ष के क्रॉस केस (कातिलाना हमले के आरोप) में भी अदालत ने सुनवाई करते हुए छह लोगों को दोषी पाया। कोर्ट ने उन्हें पांच-पांच साल के साधारण कारावास और 29 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 19 साल पुराने इस चर्चित मामले में आए फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में चुनावी रंजिश के इस खूनी खेल और अदालती न्याय की जबरदस्त चर्चा है।

