सिर्फ मान्यताएँ ही नहीं: विज्ञान भी कहता है गाय को पवित्र- अतुल मलिकराम

सिर्फ मान्यताएँ ही नहीं: विज्ञान भी कहता है गाय को पवित्र- अतुल मलिकराम

भारत अपनी युगों पुरानी मान्यताओं और अद्भुत परंपराओं की गोद में फला-फूला देश है। प्राचीन काल से ही पशु जीवन के प्रति हिंदू धर्म में गहन आस्था रही है। और विशेष तौर पर जब गाय की बात आती है, तो यह विश्वास कई गुना बढ़ जाता है। गायों को दैवीय स्वरुप और प्रकृति का उपकार माना जाता है। लेकिन बतौर मान्यता ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तौर पर भी गायों को उनकी विशेषताओं के चलते एक अनूठी प्रजाति का दर्जा प्राप्त है। इसका कारण है कि कई परीक्षणों में गाय और इसकी विशेषताएँ हर दफा खरी उतरी हैं। 
अमेरिकी कृषि विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'द काउ इज़ ए वंडरफुल लैबोरेटरी' के अनुसार, तमाम मवेशियों और दुधारू पशुओं के बीच एकमात्र गाय ही है, जिसे प्रकृति ने 180 फीट (2160 इंच) लंबी आँत दी है। ऐसे में गाय जो कुछ भी खाती या पीती है, वह अंतिम छोर तक जाता है। गाय को सबसे कोमल और दयालु पशु माना जाता है। गाय तब तक दूध नहीं देती है, जब तक कि वह अपने बच्चे को दूध न पिला दे, लेकिन इस स्थिति में आप भैंस या जर्सी हॉलिस्टन से दूध आसानी से ले सकते हैं। ऐसे में यह कहना कहाँ गलत होगा कि यह पशु दुनिया को ममत्व और प्रेम की शक्ति का प्रतीक है।
बछड़े को जन्म देने के बाद 15 दिनों तक गाय के दूध में लैक्टोज़, वसा और पानी की मात्रा कम होने के साथ ही खनिज तत्वों की मात्रा प्रोटीन से भी अधिक होती है। इसमें एल्ब्यूमिन की दोगुनी, ग्लोब्युलिन की 12-15 गुना और एल्युमिनियम की 6 गुना अधिक मात्रा पाई जाती है। गाय के दूध में लगभग 87% पानी, 4% वसा, 4% प्रोटीन, 5% चीनी और 1 से 2% अन्य तत्व पाए जाते हैं। 'कैरोटीन' नाम का एक और पदार्थ है, जो भैंस की तुलना में गाय में दस गुना अधिक होता है। भैंस के दूध को गर्म करने पर उसके अधिकांश पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जबकि गाय के दूध के पोषक तत्व गर्म करने पर भी सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा, गाय के सींगों का पिरामिड जैसा आकार शक्तिशाली एंटीना की तरह ब्रह्मांडीय ऊर्जा को सहेजने का कार्य करता है।
विज्ञान द्वारा पूजी जाने वाली गाय की वंदना, वैदिक काल से की जा रही है। गाय को पृथ्वी का प्रतीक, कृपालु स्वभाव, पोषण करने वाली और बिना कुछ माँगे बहुत कुछ देने वाली कहा जाता है। भारतीय पौराणिक कथाओं में, गाय को 'कामधेनु' के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है सभी इच्छाएँ पूरी करने वाली। गाय का यह नाम मनुष्य के साथ संबंध के रूप में बखूबी मेल खाता है। गाय, मनुष्य के लिए कई मायनों में गुणकारी है। इस सूची में सबसे पहले आता है गाय का दूध, जो कि वसा रहित मक्खन का उत्पादन करता है। प्रोटीन और कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत होने के साथ ही विटामिन बी 12 और आयोडीन सहित पोषक तत्व भी गाय के दूध में शामिल होते हैं, जो इसे बीमारियों के खिलाफ सबसे अच्छे प्राकृतिक उपचारों में से एक बनाते हैं। 
औषधीय दृष्टि से गोमूत्र आयुर्वेद का खजाना है। इसमें 'कार्बोलिक एसिड' होता है, जो एंटी-बैक्टीरियल और 'करक्यूमिन' होता है। यह कैंसर से बचाव करने में कारगर है। इनके अलावा गोमूत्र में नाइट्रोजन, फॉस्फेट, यूरिक एसिड, पोटेशियम, सोडियम, लैक्टोज़, सल्फर, अमोनिया, नमक रहित विटामिन ए, वी, सी, डी, ई, एंजाइम आदि भरपूर होते हैं। कुल मिलाकर गोमूत्र में मुख्य रूप से 16 खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। साथ ही काली गायों के दूध में मौजूद खनिज क्षय रोग को ठीक कर सकते हैं। देशी गायों के गोबर-मूत्र के मिश्रण से प्रोपलीन ऑक्साइड बनता है, जो बारिश में मददगार है। इस मिश्रण से एथिलीन ऑक्साइड गैस निकलती है, जिसका प्रयोग ऑपरेशन थियेटर में किया जाता है। ऐसे हजारों उदाहरणों की सूची भरी पड़ी है, जो गाय को महान बनाते हैं। 
वैज्ञानिक तौर पर बेहद उपयोगी होने के साथ ही विनम्र स्वभाव की धनी गाय हिंदू धर्म के प्रवाह के कई उदाहरण पेश करती है। गाय गरिमा, शक्ति, धीरज, मातृत्व और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक है। वेदों में भी गाय को महान बताया गया है। यही वजह है कि मानव के साथ ही साथ विज्ञान भी गाय को पूजता है।

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