कृषि संभाग की मासिक कार्यशाला सम्पन्न
भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय) 31 जुलाई। कृषि संभाग भरतपुर की मासिक कार्यशाला संयुक्त निदेशक धर्मपाल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। कार्यशाला में जुलाई माह की विभागीय प्रगति की समीक्षा की गयी तथा अगस्त माह में किये जाने वाले कृषि कार्यो की चर्चा की गयी। कृषि संभाग भरतपुर के लगभग 50 से अधिक कृषि अधिकारियों ने भाग लिया।
संयुक्त निदेशक ने कहा कि जो किसान जुलाई माह में फलदार बगीचे नहीं लगा पाये हैं, वे अगस्त माह में फलदार पौधे लगा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पौधे उन्नत किस्म के हो तथा वानस्पतिक विधि जैसे कलम, ग्राफ्टिंग या वडिंग आदि से तैयार होने चाहिए, क्योंकि बीजू पौधे शुद्ध किस्म के नही होते हैं तथा देर से फल देना शुरू करते हैं। उन्होंने फल एवं सब्जियों में लगने वाले कीट एवं बीमारियों की पहचान एवं उनके नियंत्रण के उपाय बताये।
कृषि महाविद्यालय भुसावर के डीन डॉ. उदय भान सिंह ने जानकारी देते हुये बताया कि नीबू की तितली व सिट्रस सिल्ला के नियंत्रण के लिए क्यूनालफाँस 25 ईसी 1.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करना चाहिए। नीबू में लीफ माइनर की रोकथाम के लिए इमीडाक्लोप्रिड 0.3 मि.ली. प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करें। उन्होंने कहा कि अमरूद में फल मक्खी के नियंत्रण के लिए मेलाथियॉन 50 ईसी एक मि.ली. प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिडकाव करना चाहिए। टमाटर, बैंगन, मिर्च में पर्णकुंचन व मौजेक के लिए इमीडाक्लोप्रिड 17.8 एस एल 0.3 मि.ली. प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करना चाहिए। भिण्डी के पीतशिरा मौजेक की रोकथाम के लिए इमीडाक्लोप्रिड 0.3 मि.ली. प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करे। उन्होंने कहा कि कुष्माण्ड कुल की सब्जियों में तुलासिला रोग के नियंत्रण के लिए मेन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करना चाहिए। नीबू में साइटस कैंकर के लिए बोरडेक्स मिश्रण 5ः5ः50 या स्ट्रेप्टोसाइक्लीन 250 मि.ग्रा. व बाविस्टीन 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करें।

