झुंझुनू :लोहार्गल के लक्खी मेले मे श्रद्धालुओं ने सूर्य कुंड में लगाई आस्था की डुबकी, मंदिरों में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
उदयपुरवाटी (सुमेर सिंह राव)
गोगा नवमी से शुरू हुई बाबा मालकेतु की 24 कोसी परिक्रमा अमावस्या पर स्नान के साथ संपन्न हुई। परिक्रमा के सातवें दिन श्रद्धालुओं ने लोहार्गल धाम के सूर्य कुंड में श्रद्धा की डुबकी लगाई। इसके बाद सूर्य नारायण, वेंकटेश्वर एवं लक्ष्मी नारायण सहित विभिन्न मंदिरों में दर्शन किए। लोहार्गल धाम के लक्खी मेले में परिक्रमार्थियों के अलावा भी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। लोहार्गल स्थित सूर्य मठ के पीठाधीश्वर रामानुजाचार्य महंत अवधेशाचार्य महाराज ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस साल भी लाखों श्रद्धालुओं ने सूर्य क्षेत्र 24 कोसी परिक्रमा की। यह परिक्रमा अनादि काल से देवताओं द्वारा भगवान शंकर ने अपने पूरे परिवार के साथ इस परिक्रमा को आरंभ की थी। तब से परिक्रमा साधु संत व सनातनी बंधुओं द्वारा निरंतर की जा रही है। मान्यता है कि परिक्रमा करने से जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है एवं पितरों से आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ठाकुर जी की पालकी के साथ पैदल चलकर विभिन्न धार्मिक स्थलों पर स्नान करते हुए 24 कोस की परिक्रमा पूरी की। शुक्रवार को परिक्रमा लौटे श्रद्धालुओं ने गोल्याणा से लोहार्गल तक सैंकड़ों धर्मशाला और विश्राम स्थलों में डेरा डाले रखा। शुक्रवार की मध्य रात्रि से लोहार्गल के सूर्यकुंड पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का जमघट लग गया। गोल्याणा से लोहार्गल तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। खास चौक से सूर्यकुंड तक रास्ते में श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहा। प्रशासन ने भीड़ कंट्रोल करने के लिए आयुर्वेद औषधालय से सूर्य कुंड तक श्रद्धालुओं के आवागमन पर विशेष ध्यान रखा वही कुंड पर भी पुलिस के जवानों ने तैनात रहकर हर तरह से ध्यान रखा। सूर्य कुंड में पर्दा लगाकर महिलाओं एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग स्नान की व्यवस्था की गई। कुंड पर मौजूद पुलिस के जवानों और महिला कांस्टेबल श्रद्धालुओं को अधिक समय तक रूकने नहीं दिया जिससे सूर्य कुंड पर भीड़ कम रही। श्रद्धालुओं की गाड़ियों को गोल्याणा में ही रोक दिया गया। इस 4 किलोमीटर के रास्ते में भीड़ अधिक होने से यात्रियों को काफी परेशानी हुई। पदयात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने रात भर भजनों व रंगारंग कार्यक्रमों का खूब आनंद लिया। श्रद्धालुओं ने अमावस्या का स्नान कर विभिन्न मंदिरों में भगवान के दर्शन किया वहीं लौटते वक्त मलकेतु बाबा के दर्शन कर जयकारे लगाते हुए मेले में शामिल हुए।
सूर्य क्षेत्र और कुंड का इतिहास :
सूर्य मठ के पीठाधीश्वर महंत अवधेशाचार्य महाराज ने बताया कि कहा जाता है सूर्य भगवान को यह स्थान अति प्रिय लगा। उन्होंने भगवान विष्णु की यहां सपत्नीक बैठकर आराधना की। विष्णु के इसका कारण पूछने पर सूर्य ने कहा कि यह स्थान इतना रमणीय है कि मैं इसे अपना घर बनाना चाहता हूं। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर यह स्थान सूर्य भगवान को वरदान में दे दिया तभी से इस स्थान का नाम सूर्य क्षेत्र पड़ा। उन्होंेने बताया कि भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार के समय इस सूर्य क्षेत्र लोहार्गल धाम को ब्रह्म क्षेत्र लोहार्गल धाम के नाम से जाना जाता था। यहां 72 किलोमीटर का सरोवर (24 कोसी) था। समुद्र के बेटे शंखासुर के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने इसी जगह धरती का प्रथम मत्स्य अवतार लिया और उनके चरणों के स्पर्श से यह सरोवर इतना पवित्र हो गया कि इसके दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।
दिन भर बरसात होने की वजह से सूर्य कुंड पर स्नान करने वालों की भीड़ कम रही
लोहार्गल क्षेत्र में दिन भर बरसात होने की वजह से सूर्य कुंड में स्नान करने वाले 24 कोसी परिक्रमार्थियों की भीड़ काफी कम नजर आई। दिन भर रुक-रुक कर बरसात होने की वजह से श्रद्धालु बरसात रुकने का इंतजार करते रहे और थोड़ी-थोड़ी देर में 10-20 श्रद्धालु स्नान करने के लिए सूर्य कुंड पहुंच रहे थे। श्रद्धालुओं की संख्या जहां रास्ते में देखने को अधिक मिली वहीं विश्राम स्थलों पर भी देखने को मिली। मगर सूर्य कुंड में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या काफी काम ही देखने को मिली।
बरसात ने कर दिया मेले का आनंद किरकिरा
लोहार्गल के बाबा मालकेतु की 24 कोसी परिक्रमा मेले में बाहर से आए दुकानदारों की मानें तो इस बार मेले में दिन भर बरसात होने से उनका सामान काफी कम मात्रा में बिका जिससे इस बार उनका मेले आनंद किरकिरा हो गया। रास्तों पर लगाई गई दुकानों को दुकानदार बार-बार प्लास्टिक के तिरपाल से ढक रहे थे इस वजह से इस बार उनका सामान नहीं बिका।
रात भर हुए रंगारंग कार्यक्रम
गोल्याणा से लोहार्गल तक शुक्रवार की रात को करीब दो दर्जन से भी अधिक स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। गोल्याणा में शिव गोरा मंदिर ट्रस्ट की ओर से भजन संध्या का आयोजन किया गया। गणेश मंदिर के सामने प्रगतिशील कुमावत समाज की ओर से रंगारंग कार्यक्रम हुए। इसके अलावा जाट धर्मशाला, सैनी धर्मशाला, बाबा रामदेव मंदिर, विश्वकर्मा धर्मशाला,बिड़ला धर्मशाला, सहित कई जगह भजन कीर्तन होते रहे। पूरी रात भर श्रद्धालु इन भजन कीर्तन का आनंद लेते रहे।