प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार का खेल, पक्के मकान व शौचालय बने होने के बावजूद फिर से प्रधानमंत्री आवास योजना व शौचालय निर्माण में राशि आवंटित कर खर्च करने का मामला
सरपंच ने विकास अधिकारी को दी लिखित शिकायत, यदि अन्य अन्य ग्राम पंचायतों की जांच हो तो खुल सकती है भ्रष्टाचार के खेल की पोल
रामगढ़ (अलवर /राधेश्याम गेरा )रामगढ़ उपखण्ड क्षेत्र की ग्राम पंचायत चौमा में ग्राम विकास अधिकारी और उसके चहेतों द्वारा मोटी कमाई करने के चक्कर में पूर्व में बने बनाए मकानों व शौचालयों को फिर से प्रधानमंत्री आवास योजना में स्वीकृत करा राशि खर्च कराने व पूर्व में शौचालय बने होने के बावजूद फिर से शौचालय की राशि चयनित परिवार के लोगों द्वारा खर्च कराने का मामला प्रकाश में आया है।
और हैरानी तो यह है कि इन सबकी शिकायत ग्राम पंचायत सरपंच द्वारा पंचायत समिति के विकास अधिकारी को लिखित रूप से दी गई है।
सरपंच संतरा सैनी द्वारा दी गई शिकायत में लिखा है कि ग्राम विकास अधिकारी ने तानाशाही रवैया अपना रखा है ग्राम पंचायत कार्यालय पर नियमित व समय पर नहीं आता और ना ही सरपंच ( प्रशासक) का फोन उठाता है। ग्राम विकास अधिकारी द्वारा वर्ष 2023-24 से अब तक अनेक फर्जी बिलों से भुगतान उठाकर अपने निजी कार्यों में खर्च किया गया है।
ग्राम पंचायत द्वारा निविदा अनुसार छोडे गए टेंडर धारकों से सुविधा शुल्क नहीं मिलने पर वर्क आर्डर जारी नहीं करता। यदि वर्क आर्डर जारी करता है बिना हस्ताक्षर के ही जारी कर दिया जाता है। जिससे ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है। श्रमिकों को समय पर भुगतान नहीं किया जाता। जिससे श्रमिक बार बार ग्राम पंचायत के चक्कर लगाते रहते हैं।
शौचालय बनवाने के राशि स्वीकृत कराने की एवज में पांच सौ रुपए से लेकर हजार डेढ हजार रुपए तक का सुविधा शुल्क वसूल किया जाता है। भ्रष्टाचार के चलते पीएम आवास योजना में बने मकानों के बावजूद फिर से स्वीकृत कराया गया है ।
भ्रष्टाचार का खेल इस कदर फैला हुआ है कि पहले शौचालय निर्माण के लिए राशि परिवार के मुखिया व्यक्ति के नाम पर उठा ली गई थी फिर उनमें से अनेक लोगों को भ्रष्टाचार का खेल करते हुए उनकी पत्नी के नाम से उसी शौचालय को फिर बनवाने के नाम पर राशि आवंटित करा दी गई।
अनेक ग्राम पंचायतों में जितने परिवार थे उससे भी ज्यादा लोगों के नाम से शौचालय निर्माण करा दिए गए थे।
ऐसे हुआ भ्रष्टाचार का खेल _
पहले घर के मुखिया व्यक्ति के नाम के साथ उसके पिता का नाम लिखा गया फिर उसी शौचालय को बनवाने के नाम पर महिला और उसके पति का नाम दर्ज किया गया। जिससे गुपचुप में भ्रष्टाचार का खेल होता रहा । उच्च अधिकारियों ने भी हिस्सा मिलने के कारण अपना मुंह बंद रखा।
राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में सफाई के नाम पर दस लाख रुपए प्रति वर्ष आवंटित किया जा रहा है उसके बावजूद अनेक ग्राम पंचायतों में जगह-जगह आम रास्तों पर गंदगी के ढेर लगे दिखाई दे रहे हैं।
चौमा ग्राम पंचायत द्वारा की गई शिकायत के बारे में विकास अधिकारी विजय भाल से जानकारी मांगने पर बताया कि हमने कमेटी गठित कर जांच के आदेश दे दिए हैं और जांच कमेटी एक बार ग्राम पंचायत चौमा में जांच के लिए गई थी लेकिन ग्राम विकास अधिकारी की ड्यूटी एसआईआर में लगी होने के कारण जांच नहीं हो पाई है। और हमने ग्राम विकास अधिकारी को वित्तीय लेनदेन करने पर पाबंदी लगा दी है।
सरपंच संतरा सैनी के प्रतिनिधि पति रघुवीर सैनी ने बताया कि हमने कई दिनों पूर्व लिखित शिकायत दी है लेकिन अभी तक कोई जांच नहीं हुई है।अभी भी हमें चार दिसम्बर के बाद में शिकायत की जांच किए जाने को कहा गया है।


