अंतिम संस्कार के बाद पता चला,शव किसी और का: अस्थि विसर्जन करने जाने लगा परिवार, तब पता लगा बुजुर्ग मुस्लिम था
ये कैसी गफलत दोषी कौन, अज्ञात मृत की लाश परिजनों को सौंपी किया दाह संस्कार। गंगा ले जाने की हो रही थी तैयारी पुलिस का फोन आया आपके आदमी कि लाश ले जाओ
राजगढ़ (अलवर/ अनिल गुप्ता) कस्बे के समीप स्थित गांव थाना राजाजी के रहने वाले एक वृद्ध के करीब पचास साल से नदारद रहने के बाद छः दिसंबर को एमआईए थाना अलवर से परिजनों के पास फोन आया की उनके परिजन की लाश अलवर रखी हुई है। इस पर परिजनों ने अलवर अस्पताल के चीरघर से सभी कानूनी कार्यवाही पूरी कर प्राप्त कर ली जिसे वो अपने ग्राम थाना राजाजी ले गए। जहां पर उसका हिंदू रीति रिवाज के साथ दाह संस्कार कर दिया गया। मंगलवार को उक्त अज्ञात मृतक के तीसरे की रस्म पूरी कर गंगा ले जाने की तैयारी चल रही थी। तभी अलवर पुलिस ने फोन पर बताया की उनके परिजन की लाश अलवर के राजकीय चिकित्सालय के चीरघर में रखी हुई है जिसे ले जाएं।इस पर मृतक कैलाश चंद शर्मा के परिजन अलवर अस्पताल पहुंचे और मृतक कैलाश के शव को लिया।
गौरतलब रहे कि इस प्रकार की गड़बड़ी आखिर क्यों हुई।
अलवर जिला हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में 80 साल के कैलाश और 73 साल के मोहम्मद साबिर के शवों को लेकर गफलत पैदा हो गई। कैलाश के परिवार के लोग साबिर का शव ले गए और अंतिम संस्कार भी कर दिया। तीसरे दिन अस्थियां विसर्जन करने हरिद्वार जाने लगे। तब पता लगा कि उन्होंने जिसका अंतिम संस्कार किया है, वो एक मुस्लिम व्यक्ति था।
मामले खुलने पर आज जिला हॉस्पिटल में मुस्लिम समाज के लोग और मृतक कैलाश का परिवार पहुंचा। दोनों पक्षों ने इसे पुलिस और हॉस्पिटल प्रशासन की घोर लापरवाही बताया। दोनों पक्षों का कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। मामला कोतवाली थाने का है।
दरअसल, ये पूरा मामला एमआईए थाना पुलिस और जीआरपी पुलिस की ओर से 6 दिसंबर को हॉस्पिटल में लाए गए शवों के कारण पैदा हुआ। मोहम्मद साबिर के शव पर कैलाश का आधार कार्ड लगा दिया गया। ऐसे में कैलाश का परिवार साबिर का शव ले गया।
सड़क किनारे मिला था कैलाश का शव
एमआईए थाना पुलिस को 6 दिसंबर को कैलाश (80) पुत्र रामप्रसाद निवासी थानाराजाजी राजगढ़ का शव एमआईए में फैक्ट्री के किनारे सड़क पर मिला था। पुलिस को पास ही एक झुग्गी में बुजुर्ग का आधार कार्ड मिला था। उससे पहचान की गई। बुजुर्ग अविवाहित था और उसका खुद का परिवार नहीं है।
पुलिस ने उसके भाई के परिवार को सूचना दी। मृतक बुजुर्ग का भतीजा 7 दिसंबर को शव लेने जिला हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में पहुंचा था।
अंतिम संस्कार के तीसरे दिन पता चला, शव कैलाश का नहीं
भतीजा भी शव नहीं पहचान पाया, क्योंकि बुजुर्ग 30 साल से घर से बाहर था। ऐसे में आधार कार्ड लगे शव को वो लेकर चला गया। घर ले जाकर शव का अंतिम संस्कार किया।
तीसरे दिन आज दोपहर करीब 3 बजे अस्थियां विसर्जन करने जा रहे थे। तब एमआईए पुलिस का फोन आया। पुलिसकर्मियों ने कहा कि अपना शव ले जाओ। परिवार ने बताया कि हम अंतिम संस्कार कर चुके।
ये सुनकर पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए। सूचना पर परिवार वापस हॉस्पिटल पहुंचा। तब पता चला कि उन्होंने जिसका अंतिम संस्कार किया, वो व्यक्ति मुस्लिम था।
ट्रेन में मिला था मुस्लिम व्यक्ति का शव
जीआरपी थाना प्रभारी अंजू महेंद्रा ने बताया कि 6 दिसंबर को गुलाम साबिर नाम का व्यक्ति पाली से फैजाबाद जा रहा था, जिसकी ट्रेन में मौत हो गई थी। शव अलवर जंक्शन पर उतारा गया था, जिसे बुजुर्ग कैलाश का परिवार ले गया था और अंतिम संस्कार कर दिया था। जीआरपी पुलिस ने अलवर जिला हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में शव रखवाया था।
मुस्लिम समाज ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की
मुस्लिम महासभा के जिलाध्यक्ष राहुल खान ने बताया कि अलवर जीआरपी पुलिस को गुलाम साबिर के शव के पास एक डायरी मिली थी। डायरी पर लिखे नंबरों से उनकी पूरी जानकारी मिली थी। पता चला था कि गुलाम साबिर पाली में एक मजार पर करीब 30 साल से रह रहा था। मजार के लिए चंदा इकट्ठा के लिए अलग-अलग जगह जाता था। उसका अपना परिवार नहीं है। वह अकेला था। ऐसे में पुलिस ने हमें सूचना दी। हम रविवार को शव देखने आए थे।
3 दिन उनके किसी भी परिचित के नहीं आने पर आज शव लेना था। ऐसे में जिला हॉस्पिटल आए थे। तब जीआरपी पुलिसकर्मी भी साथ थे। उन्होंने शव देखा। तब पता चला कि शव की अदला-बदली हुई है। राहुल खान ने बताया कि मुस्लिम समाज की ओर से कोतवाली थानाधिकारी को सरकारी हॉस्पिटल के प्रभारी, मोर्चरी प्रभारी और इसमें लिफ्त सभी स्टाफ के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की शिकायत दी है।