अवैध खनन, DGMS उल्लंघन और दमन की आशंका से उबलता जालिया — 292 दिन से आंदोलन, समाधान शून्य
भीलवाड़ा (बृजेश शर्मा) जिले की बनेड़ा तहसील का छोटा-सा गाँव जालिया, लगभग एक साल से खनन कंपनियों की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता के बीच पिस रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिंदल कंपनी द्वारा अवैध खनन, प्रतिबंधित ड्राई ड्रिलिंग और माइन सेफ्टी नियमों की खुलेआम अवहेलना जारी है, जबकि प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
ग्रामवासी 292 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर हैं। इससे पहले भी 205 दिनों तक आंदोलन चला था और प्रशासन व पुलिस की मौजूदगी में जिंदल कंपनी के साथ लिखित समझौता हुआ था। तय हुआ था कि सात दिन में समाधान लागू होगा, पर समझौता फाइलों में दबकर आज तक नहीं निकला।
???? DGMS नियमों की धज्जियाँ उड़ने का आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि DGMS की अनुमति के अनुसार 34 मिमी चौड़ाई की ड्रिलिंग, 2–3 किलो विस्फोटक की सीमा तय है।
इसके उलट कंपनी द्वारा 125 मिमी चौड़ाई, 50–60 किलो विस्फोटक, का उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह न सिर्फ अवैध है, बल्कि पूरे गाँव को मौत के साए में धकेल रहा है।
???? लाम्पिया पॉइंट पर प्रतिबंधित ड्राई ड्रिलिंग
ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि जिंदल शॉ लिमिटेड लाम्पिया पॉइंट पर ड्राई ड्रिलिंग कर रही है, जबकि यह क्षेत्र में पूरी तरह प्रतिबंधित है।
नतीजा— मकानों में गहरी दरारें, घरों का ध्वस्त होना, महिलाओं व ग्रामीणों के घायल होने की घटनाएँ, बच्चों और पशुओं में घबराहट, डर और श्वास संबंधी दिक्कतें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
गाँव में धूल के गुबार से वातावरण कई किलोमीटर तक धुंधला रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि ये हालात "यदि अब भी नहीं रुके तो गाँव रहने लायक नहीं बचेगा।"
???? फसलें, पेड़-पौधे और पेयजल संकट
भारी ब्लास्टिंग से उठती धूल फसलों पर जम जाती है। उत्पादन आधा हो गया, किसानों का दावा पेड़ सूखने लगे हैं। कुओं का पानी खराब होकर पीने योग्य नहीं रहा। ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से उच्च-स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
???? स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव — चर्म रोग और सांस की बीमारियाँ
धूल-ध्वनि प्रदूषण से महिलाओं बुजुर्गों बच्चों में चर्म रोग और दमा जैसी समस्याएँ बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित परिवारों की स्वास्थ्य जांच शिविर लगाई जाए।
???? पुलिस द्वारा 151 CrPC में पाबंद करने की तैयारी?
ग्रामवासियों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन शांतिपूर्ण स्थल पर बैठे किसानों को धारा 151 CrPC में पाबंद करने की तैयारी कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह अधिकारों का स्पष्ट हनन है और यह खनन कंपनी के दबाव में उठाया जा रहा कदम प्रतीत होता है।
???? किसानों की प्रमुख मांगें (लगातार आंदोलन का आधार)
- जालिया में अवैध खनन व हैवी ब्लास्टिंग तुरंत बंद कराई जाए।
- DGMS नियमों का सख्त पालन हो।
- पूर्व में किया गया लिखित समझौता लागू किया जाए।
- खसरों में हुई गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच हो।
- जांच पूरी होने तक पत्थरगड़ी प्रक्रिया पर रोक लगे।
- आंदोलनरत किसानों पर किसी भी दमनात्मक कार्रवाई को रोका जाए।
- जिला कलेक्टर व खनिज विभाग द्वारा एक साल पहले DGMS को भेजे पत्र पर अभी तक कार्रवाई न होने का जवाब दिया जाए।
???? ग्रामीणों की अंतिम अपील — “हमें न्याय दिलाएँ”
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता, तो जालिया गाँव "अवैध ब्लास्टिंग का शिकार" बनता जाएगा। ज्ञापन जालिया गाँव के सभी प्रताड़ित किसानों द्वारा संयुक्त रूप से सौंपा गया है।

