गुरु के आखिरी दर्शन करने पहुंचे मुख्यमंत्री, मंन्दिर परिसर में हुआ अन्तिम संस्कार , बेटे ने दी मुखाग्नि
भरतपुर (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) भरतपुर के सेवर स्थित लुधावई बडा हनुमान मंदिर के महन्त श्री रामदास महाराज के आखिरी दर्शन करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा लुधावई पहुंचे। महन्त श्री रामदास के शव को मुखाग्नि मंन्दिर परिसर में ही दी गई। इससे पहले मुख्यमंत्री शर्मा ने शव की परिक्रमा लगाई। चन्दन की लकड़ी एवं पुष्प चक्र अर्पित कर अपने गुरु को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जिसके बाद मुख्यमंत्री जयपुर के लिए रवाना हो गए।
प्रातः हुआ महन्त श्री रामदास जी महाराज का निधन
लुधावई गांव में हाइवे रोड किनारे बड़ा हनुमान मंदिर स्थित है। जिसके महन्त श्री रामदास जी महाराज थे। जो कि काफी लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। आज सुबह उनका आरबीएम अस्पताल के आईसीयू वार्ड में निधन हो गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा महन्त श्री रामदास जी महाराज को अपना गुरु मानते थे। मुख्यमंत्री शर्मा हर वर्ष गुरु पूर्णिमा पर अपने परिवार के साथ महन्त के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने बड़ा हनुमान मंदिर पहुंचते थे। महन्त के निधन की खबर सुन मुख्यमंत्री शर्मा ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए एक पोस्ट भी किया।
मुख्यमंत्री पहुंचे अपने गुरु के आखिरी दर्शन करने के लिए
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शाम करीब 4.00 बजे हेलीकॉप्टर के द्वारा एमएसजे कालेज ग्राउंड पहुंचे। कालेज ग्राउंड से कार द्वारा लुधावई पहुंचे। जहां उन्होंने महन्त श्री रामदास जी महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जिसके बाद मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर द्वारा जयपुर के लिए रवाना हो गए। महन्त श्री रामदास जी महाराज के शव को मुखाग्नि उनके बेटे मुकेश दास ने दी। इस दौरान विधायक शैलेश सिंह, जिलाध्यक्ष शिवानी दायमा सहित भाजपा के नेता एवं श्रृद्धालु मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा
लुधावई मंन्दिर के महन्त पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 श्री महामंडलेश्वर श्री रामदास महाराज जी के देवलोक गमन का समाचार हृदय को अत्यंत पीड़ा पहुंचाने वाला है।उनका सम्पूर्ण जीवन भक्ति, त्याग, करुणा और सनातन धर्म के मूल्यों की सेवा में समर्पित रहा।वे केवल एक संन्त ही नहीं वल्कि असंख्य श्रृद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक पथ प्रदर्शक और प्रेरणास्रोत थे। उनके सानिध्य से मिली शिक्षा और आशीर्वाद सदैव स्मृतियों में जीवित रहेंगे। परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक-संतप्त शिष्यों, भक्तों और श्रृद्धालुओं को इस अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

