भरतपुर जिले में एक जिला एक उपज के तहत शहद को मिलेगा नया बढ़ावा

Jan 6, 2026 - 12:06
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भरतपुर जिले में एक जिला एक उपज के तहत शहद को मिलेगा नया बढ़ावा

मधुमक्खी पालन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रस्तावित

भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) बढ़ती आबादी और सीमित संसाधनों के कारण रोजगार की समस्या से निपटने के लिए मधुमक्खी पालन एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है। कृषि लागत में वृद्धि और जोतों के बंटवारे से कृषि कार्य अब पूरे परिवार का पालन-पोषण करने में असमर्थ हो रहा है। ऐसी स्थिति में शहद उत्पादन आसानी से शुरू किया जा सकता है, जो अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है।
भरतपुर जिला मधुमक्खी पालन में अग्रणी है। वर्ष 1997 से यहां यह कार्य शुरू हुआ, जिसमें वर्तमान में लगभग 585 इकाइयों से 1600 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष और 2000 को परोक्ष रोजगार मिल रहा है। जिले में करीब 80 हजार मधुमक्खी बॉक्स हैं, जिनसे सालाना लगभग 2400 मीट्रिक टन शहद और 48 मीट्रिक टन मोम का उत्पादन हो रहा है। जिले की एकमात्र निजी शहद प्रसंस्करण इकाई बृज हनी मधुमक्खी पालकों का मुख्य खरीदार है।
उद्यानिकी विभाग उप निदेशक जनक राज मीना ने बताया कि पंच गौरव कार्यक्रम के तहत प्रस्ताव भरतपुर में एक जिला एक उपज के रूप में शहद का चयन किया गया है। मधुमक्खी पालन को और बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री की बजट घोषणा 2023-24 के तहत भरतपुर में मधुमक्खी पालन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जा रही है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-21 पर ग्राम मई गुर्जर में 9.83 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। केंद्र की आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा कार्य किया जा रहा है।
इस केंद्र में निम्न सुविधाएं विकसित की जाएंगी-
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण ऑडिटोरियम एवं वी.सी. मीटिंग हॉल,शहद गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला,मोम शीट मेकिंग कक्ष, शहद प्रसंस्करण एवं बॉटलिंग यूनिट, स्टोरेज गोदाम (शहद एवं मोम के लिए),मधुमक्खी पालन उपकरण एवं बॉक्स बनाने की इकाई,प्रशिक्षणार्थी हॉस्टल,चिल्ड्रन बी-पार्क एवं लाइव बी पार्क डेमोंस्ट्रेशन, शहद पार्लर आदि सुविधाएं विकसित की जाएंगी। केंद्र स्थापना के बाद शहद का संग्रहण, भंडारण, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही कृषकों को उन्नत तकनीक एवं उत्पादन वृद्धि संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंच गौरव कार्यक्रम के तहत प्रथम वर्ष में दो प्रमुख प्रस्ताव हैं। पहला उत्कृष्टता केंद्र की आधारभूत सुविधाओं का विकास एवं दूसरा मधुमक्खी पालकों एवं कृषकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना। प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला स्तर पर पंचायत समिति वार आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक प्रशिक्षण में 50 कृषक भाग लेंगे, जो एक दिवसीय होगा। प्रति कृषक प्रतिदिन 1000 रुपये व्यय की व्यवस्था है। प्रशिक्षण केंद्र ऑफ एक्सीलेंस, आत्मा कार्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र आदि पर होंगे।
14 प्रशिक्षणों का लक्ष्य-
उन्होंने बताया कि पंच गौरव कार्यक्रम के तहत सेवर, नदबई, वैर, भुसावर, उच्चैन, बयाना तथा रूपवास के कुल 700 मधुमक्खी पालक/कृषकों के लिए कुल वित्तीय प्रावधान 14 लाख रुपये के व्यय से 14 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायेगें। यह पहल जिले में शहद उत्पादन को बढ़ावा देगी, रोजगार सृजन करेगी एवं किसानों की आय में वृद्धि करेगी। शहद उत्पादन को प्रोत्साहन के लिए मधु पालकों को निःशुल्क बी कीपिंग किट उपलब्ध करवाई जाएगी।
शहद प्रकृति का अमृत-पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक मीठा पदार्थ
उन्होंने बताया कि शहद प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक अनमोल उपहार है, जो न केवल मीठास प्रदान करता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए अनेक लाभ भी देता है। मधुमक्खियां पौधों के नेक्टर या जीवित भागों पर रहने वाले कीटों के उत्सर्जन से एकत्रित रस को अपने शरीर में विशिष्ट पदार्थों के साथ परिवर्तित करके शहद का निर्माण करती हैं। यह प्रक्रिया शहद को एक अनोखा प्राकृतिक मीठा पदार्थ बनाती है। शहद की संरचना मुख्य रूप से फ्रक्टोज लगभग 39 प्रतिषत, ग्लूकोज लगभग 34 प्रतिषत, जल 17 प्रतिषत, अन्य शर्कराएं 7 प्रतिषत, कार्बाेहाइड्रेट 2.5 प्रतिषत तथा विटामिन, अमीनो एसिड और खनिज पदार्थ 0.5 प्रतिषत से मिलकर होती है। ये तत्व शहद को पोषण का एक उत्कृष्ट स्रोत बनाते हैं।
प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक शहद का उपयोग भोजन और चिकित्सा दोनों में किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि शहद में रोगाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल), सूजनरोधी (एंटी-इंफ्लेमेटरी), एंटीम्यूटाजेनिक, एंटीऑक्सीडेंट और प्रो-बायोटिक गुण पाए जाते हैं, जो विभिन्न रोगों से बचाव और उपचार में सहायक हैं। फ्लेवोनॉइड्स, फेनोलिक एसिड, कार्बनिक अम्ल, एंजाइम और अन्य सूक्ष्म घटक शहद को शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट बनाते हैं।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में शहद को उसके औषधीय गुणों, पोषण मूल्य और प्राकृतिक मिठास के कारण अमृत के समान माना गया है। यह हृदय स्वास्थ्य, त्वचा समस्याओं, पाचन सुधार, घाव भरने और प्रतिरक्षा बढ़ाने में विशेष रूप से लाभकारी है। आज के समय में जब लोग प्राकृतिक और स्वस्थ विकल्पों की ओर अग्रसर हैं, शहद एक आदर्श चुनाव है। शहद का सेवन संतुलित मात्रा में करके हम अपने स्वास्थ्य को मजबूत बना सकते हैं।

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