सरकारें बदलीं, पंचायत बदली, पर नहीं बदली अलघाना की बदहाली; कीचड़ और खेतों के बीच से गुजरी बुजुर्ग की अर्थी

Jan 21, 2026 - 08:32
Jan 21, 2026 - 09:45
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सरकारें बदलीं, पंचायत बदली, पर नहीं बदली अलघाना की बदहाली; कीचड़ और खेतों के बीच से गुजरी बुजुर्ग की अर्थी

गोविन्दगढ़, (अलवर) एक ओर सरकार 'रास्ता खोलो अभियान' के जरिए सुशासन और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं गोविंदगढ़ उपखंड क्षेत्र की नवगठित बारोली पंचायत (पूर्व में न्याणा) के गांव अलघाना से आई एक तस्वीर ने इन दावों की पोल खोल कर रख दी है। गांव में विकास की हकीकत यह है कि आज एक बुजुर्ग महिला की अंतिम विदाई में परिजनों और ग्रामीणों को भारी जद्दोजहद का सामना करना पड़ा।

​खेतों से गुजरी अंतिम यात्रा-
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव की बुजुर्ग महिला जमुना कौर पत्नी गुरदयाल सिंह का निधन हो गया। जब अंतिम संस्कार का समय आया, तो ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी बाधा श्मशान घाट तक जाने वाला मार्ग बना। श्मशान तक जाने का कोई पक्का रास्ता न होने के कारण शव यात्रा को कीचड़ भरी गलियों और सरसों के खेतों के बीच से होकर ले जाना पड़ा। सरसों की खड़ी फसल के बीच से अर्थी को कंधे पर उठाकर निकलना ग्रामीणों के लिए किसी बड़ी मशक्कत से कम नहीं था।

​पंचायतों का फेरबदल, पर हालात वही-
ग्रामीण सुखदेव सिंह ने रोष जताते हुए बताया कि गांव की गलियों की हालत बदतर है। सड़कों पर कीचड़ जमा है और श्मशान तक जाने का कोई स्थाई मार्ग नहीं है। ग्रामीण लंबे समय से रास्ते की मांग कर रहे हैं। प्रशासन बदला, सरकार बदली और अब तो गांव की पंचायत भी न्याणा से बदलकर बारोली हो गई, लेकिन अलघाना गांव के हालात जस के तस बने हुए हैं।

प्रशासनिक दावों पर सवाल:-
यह घटना उस समय सामने आई है जब प्रदेश में कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 'विकास' केवल फाइलों तक सीमित है? ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द श्मशान घाट तक जाने वाले मार्ग का निर्माण कराया जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह की पीड़ा और अपमान का सामना न करना पड़े।

  • लक्ष्मी सैनी, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत बारोली का कहना है कि- गांव अलघाना में सफाई ठेकेदार के द्वारा कार्य बंद किया हुआ है, जिसे नोटिस जारी किया गया है। जल्द ही वह सफाई प्रारंभ की जाएगी। 
  • रविंद्र तुंगर, हल्का पटवारी का कहना है कि- गांव के श्मशान घाट के लिए स्थायी मार्ग नहीं है। जिससे कि लोगों को समस्या आ रही है। पहले प्रस्ताव बना कर भेजा भी गया था। मगर आपसी रजामंदी नहीं होने के कारण मार्ग नहीं खुल पाया।

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