भीलवाड़ा में भाजपा का प्रशिक्षण महाअभियान संपन्न: सामाजिक समरसता के साथ हुआ कार्यकर्ताओं का वैचारिक निर्माण
भीलवाड़ा (बृजेश शर्मा) भाजपा प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा के नेतृत्व में जिलेभर में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान 13 से 25 मार्च तक ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न हुआ। 12 दिनों तक चले इस अभियान में जिले के 39 मंडलों में आवासीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए, जिनमें संगठनात्मक मजबूती से लेकर वैचारिक निर्माण तक व्यापक सत्र संचालित हुए।
जिला प्रवक्ता अंकुर बोरदिया ने बताया कि इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं को पार्टी की वैचारिक प्रतिबद्धता से जोड़ना, सिद्धांत आधारित कार्य-पद्धति विकसित करना, संगठन के इतिहास व विकास की जानकारी देना, तकनीक व सोशल मीडिया का उपयोग सिखाना और राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
शिविरों के संचालन के लिए जिला महामंत्री अविनाश जीनगर के संयोजन में 4 सदस्यीय जिला संचालन समिति, सातों विधानसभा में प्रभारी तथा 39 वर्ग प्रमुख नियुक्त किए गए। प्रत्येक शिविर में 24 घंटे के रात्रि विश्राम के साथ 7 सत्र आयोजित हुए। कुल 273 सत्रों में प्रशिक्षण के लिए जिलेभर से 131 वक्ताओं ने अपनी भूमिका निभाई। विशेष बात यह रही कि सभी जाति, वर्ग और समुदाय के पदाधिकारियों को अवसर दिया गया।
प्रशिक्षण शिविरों में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, हरियाणा प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया, भाजपा प्रदेश मंत्री नारायण मीणा, जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा, सांसद दामोदर अग्रवाल, विधायक उदयलाल भडाना, गोपीचंद मीणा, लालाराम बैरवा, लादूलाल पीतलिया, जब्बर सिंह सांखला, गोपाल खंडेलवाल, पूर्व सांसद सुभाष बहेड़िया, पूर्व मंत्री कालूलाल गुर्जर, पूर्व विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी, बद्रीप्रसाद गुरुजी, पूर्व महापौर राकेश पाठक सहित प्रदेश, जिला और मंडल स्तर के वक्ताओं ने विचार रखे।
शिविरों में पहली बार पार्टी की सरल एप के माध्यम से सहभागियों का रजिस्ट्रेशन किया गया तथा GPS आधारित उपस्थिति दर्ज की गई। शिविर समाप्ति पर ऑनलाइन क्विज पास करने पर प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराया गया। पूरी प्रक्रिया की केंद्र स्तर से मॉनिटरिंग हुई।
24 घंटे के प्रशिक्षण शिविरों में प्रातःकालीन प्रार्थना, योग, रात्रि में ‘शतक’ (RSS के 100 वर्षों पर आधारित फिल्म) और ‘केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों का प्रदर्शन तथा भजन संध्या ने शिविरों को रोचक और सार्थक बनाया। सामूहिक भोजन व टिफिन बैठक ने कार्यकर्ताओं में आपसी सौहार्द और सामाजिक समरसता को और प्रगाढ़ किया।
सभी शिविर सादगी और अनुशासन के प्रतीक रहे। उद्घाटन व समापन को छोड़कर अन्य सत्रों में मंच पर केवल मुख्य वक्ता व मुख्य अतिथि को ही स्थान दिया गया। जिलाध्यक्ष, वरिष्ठ नेताओं या जनप्रतिनिधियों ने भी सामान्य कार्यकर्ताओं की तरह बैठकर प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिससे अनुशासन और समानता का संदेश स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।