मीडिया की सुर्खियों से कम नहीं होगा प्रदूषण, धरातल पर प्रयास जरूरी: मंगल चंद सैनी (रिटायर्ड तहसीलदार)
बड़ागांव। (सुमेरसिंह राव) विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वरिष्ठ लेखक और रिटायर्ड तहसीलदार मंगल चंद सैनी ने पर्यावरण की भयावह स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हर साल 5 जून को सरकारी और निजी क्षेत्रों में पर्यावरण दिवस मनाने की केवल खानापूर्ति की जाती है। कागजी घोड़े दौड़ाने के बजाय जब तक जीरो ग्राउंड पर वास्तविक प्रयास नहीं होंगे, तब तक प्रदूषण की समस्या से मुक्ति नहीं मिल सकती।
सैनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि आज पूरा विश्व प्रदूषण रूपी बम के मुहाने पर बैठा है। यह भयावह स्थिति एक दिन में नहीं, बल्कि सैकड़ों सालों की लापरवाही का परिणाम है, जिसके चलते पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, पहाड़ दरक रहे हैं और ग्लेशियर सिमटते जा रहे हैं। यहाँ तक कि माउंट एवरेस्ट जैसे दुर्गम स्थान भी आज प्लास्टिक कचरे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं।
इस विशेष रिपोर्ट में पर्यावरण विनाश के निम्नलिखित मुख्य कारणों को रेखांकित किया गया है:
- जल स्रोतों पर कहर: कारखानों और मिलों का विषैला रासायनिक अपशिष्ट और सीवर का गंदा पानी सीधे नदियों में बहाया जा रहा है, जिससे जलजीवों का अस्तित्व खतरे में है।
- प्लास्टिक के पहाड़: सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर प्लास्टिक कचरे के पहाड़ खड़े हो चुके हैं, जिन्हें खाकर निराश्रित पशु असमय काल के ग्रास बन रहे हैं।
- बढ़ता वायु और ध्वनि प्रदूषण: तेल चालित वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण सड़कों पर सांस लेना दूषित हो चुका है। साथ ही विभिन्न उत्सवों पर होने वाला ध्वनि प्रदूषण वातावरण को और बिगाड़ रहा है।
बदलाव के लिए 'धरातल पर कार्य' करने का संकल्प: रिपोर्ट में केवल समस्याओं को ही नहीं, बल्कि आम नागरिक के स्तर पर किए जा सकने वाले व्यावहारिक समाधानों को भी प्रस्तुत किया गया है। यदि प्रत्येक व्यक्ति निम्नलिखित कदम उठाने का संकल्प ले, तो पर्यावरण को काफी हद तक बचाया जा सकता है:
- संस्कार से संरक्षण: प्रत्येक नागरिक अपने या परिजनों के जन्मदिन, पुण्यतिथि और वैवाहिक वर्षगांठ जैसे विशेष अवसरों पर अनिवार्य रूप से एक पेड़ लगाए और उसकी पूरी परवरिश करे।
- प्लास्टिक से तौबा: सिंगल-यूज प्लास्टिक, थैलियों, कप और गिलासों के उपयोग को पूरी तरह बंद किया जाए।
- वैकल्पिक ऊर्जा और साधन: बिजली के लिए सौर पैनल व पवन ऊर्जा को अपनाया जाए। तेल चालित वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन और वैकल्पिक (इलेक्ट्रिक) वाहनों का उपयोग बढ़े।
- कचरा व जल प्रबंधन: सीवर के पानी को ट्रीटमेंट प्लांट से साफ कर सिंचाई में उपयोग लें, घर का गंदा पानी सोखता गड्ढे में डालें, मेडिकल वेस्ट का उचित निपटान करें और पराली को जलाने के बजाय उसका सही तरीके से निस्तारण करें।


