जैन संतों पर टिप्पणी को लेकर विवाद, मेनका गांधी के बयान पर जैन समाज में नाराजगी, माफी मांग
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के बयान के बाद जैन समाज में नाराजगी फैल गई है। उन्होंने कहा कि 15 लाख मोरो की हत्या जैन मुनि की पिछी के कारण हो रही है। जैन समाज का कहना है कि मेनका गांधी ने यह कथन किस आधार पर किया? जिस धर्म में एक चींटी मारना महा पाप है तो यह बोलने से पहले हजार बार सोचना चाहिए। इस कथन को साबित करें अन्यथा संपूर्ण जैन समाज से माफी मांगे।सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर जैन समाज के लोगों ने कहा है कि मेनका गांधी ने अहिंसा की प्रतिमूर्ति माने जाने वाले जैन संतों पर तथ्यहीन और अपमानजनक आरोप लगाए हैं।
जैन समाज ने की माफी की मांग
जैन समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि जैन धर्म की मूल नींव ही 'अहिंसा परमो धर्म' पर टिकी है। जैन संत अपनी संपूर्ण जीवनचर्या में किसी भी जीव को न्यूनतम कष्ट देने का संकल्प रखते हैं। ऐसे में जैन धर्म को हिंसक बताना वास्तविकता से सौ फीसदी दूर है।
समाज के लोगों ने मांग की है कि मेनका गांधी अपने बयान के प्रमाण सार्वजनिक करें। यदि वे यह सिद्ध नहीं कर पातीं कि जैन धर्म हिंसक है, तो उन्हें जैन समाज से ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें सरेआम बकरे, मुर्गे और गोमाता सहित अन्य जीवों की बलि नही दिखाई देती है। उन्हे पहले जैन धर्म के अहिंसा सिद्धांत को समझना चाहिए।


